13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान का ‘मिनी खजुराहो’ फिर से होगा रोशन, भंडदेवरा मंदिर का ASI कराएगा जीर्णोद्धार

Bhand Deora temple: भंडदेवरा मंदिर प्राचीन नागर शैली (Nagara architecture) में बना है और रामगढ़ क्रेटर के किनारे स्थित है, जो एक दुर्लभ geo-heritage site भी है। इस मंदिर की मूर्तिकला और बारीक नक्काशी में वही गहराई और कला है जो विश्वप्रसिद्ध खजुराहो (Khajuraho) मंदिरों में दिखती है।

2 min read
Google source verification

बारां

image

Kamal Mishra

May 17, 2025

Bhand Devra Temple

राजस्थान के बारां जिले में मौजूद भंडदेवरा मंदिर ।

Bhand Deora templeबारां । राजस्थान के बारां जिले में स्थित 10वीं शताब्दी का प्रसिद्ध 'भंडदेवरा मंदिर' अब फिर से अपने पुराने वैभव को पाने जा रहा है। इस मंदिर को ‘मिनी खजुराहो’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी स्थापत्य शैली एकदम खजुराहो की तरह है। इस ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख अब ASI (Archaeological Survey of India) करने वाली है। वर्षों से उपेक्षा के शिकार इस मंदिर की दीवारें और छतें समय के साथ टूटती गईं और बहुमूल्य मूर्तियां व कलाकृतियां चोरी और तस्करी की भेंट चढ़ गईं।

नागर शैली का अद्भुत उदाहरण

यह मंदिर प्राचीन नागर शैली (Nagara architecture) में बना है और रामगढ़ क्रेटर के किनारे स्थित है, जो एक दुर्लभ geo-heritage site भी है। इस मंदिर की मूर्तिकला और बारीक नक्काशी में वही गहराई और कला है जो विश्वप्रसिद्ध खजुराहो (Khajuraho) मंदिरों में दिखती है। रामगढ़ क्रेटर की तरह ही, मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई कहानियां भी हजारों साल पुरानी विरासत की गवाही देती हैं। भंडदेवरा मंदिर में कला और भूगोल का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

यह वीडियो भी देखें :

ASI के दखल से मंदिर को मिलेगा नया जीवन

अब जब यह मंदिर राज्य सरकार से केंद्र सरकार की ASI संस्था को सौंपा जा रहा है, तो एक नई शुरुआत की उम्मीद जगी है। heritage conservation के क्षेत्र में ASI के पास न केवल संसाधन हैं, बल्कि गहन अनुभव और तकनीकी जानकारी भी है। मंदिर की सफाई, संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत का काम चरणों में शुरू किया जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि अब 'भंडदेवरा मंदिर' में एक बार फिर रौनक आने वाली है।

राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

भंडदेवरा मंदिर में की गई नक्काशी, मूर्तियां और शिल्प राजस्थान की कला परंपरा की अहम मिसाल हैं। ASI के एक अधिकारी ने बताया, “इस तरह के स्मारक को scientific restoration की जरूरत होती है, जिससे इसके सौंदर्य और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखा जा सके।” उन्होंने कहा कि यह मंदिर राज्य की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर लाने में सक्षम है।

मंदिर का इतिहास है पुराना

इस मंदिर का इतिहास भी इसकी स्थापत्य कला जितना ही रोचक है। इसे मूल रूप से नागवंशी वंश (Nagavanshi dynasty) के राजा मालय वर्मा ने एक विजय स्मारक के रूप में बनवाया था। बाद में 1162 ई. में मेड़ा वंश के राजा त्रिश्णा वर्मा ने इसका पुनरुद्धार करवाया। इसका मतलब है कि यह मंदिर दो महान राजवंशों की धार्मिक आस्था और कला का प्रतीक रहा है।

यह भी पढ़ें : राजस्थान के इन 5 जगहों पर घूमने के बाद पूरी जिंदगी याद रहेगी ट्रिप, नोट कर लें प्लेस का नाम