
कोरोनाकाल के दौरान लंबे समय से बाजारों में छाई सुस्ती अब दूर होने लगी है। रक्षाबंधन के चलते बाजारों में खरीदारी करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही हैं। वहीं मिठाई, किराना, कपड़ा, चूड़ी सहित कई दुकानों पर ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की जा रही है। कोरोनाकाल के दौरान मंदी के दौर से गुजर रहे बाजारों में लंबे समय बाद ग्राहकों की रौनक देख दुकानदार भी खुश नजर आए। मंगलवार को साप्ताहिक हाट में बड़ी संख्या में आए ग्रामीणों ने यहां आजाद सर्किल से लौटा भैरू तक लगी राखी की दुकानों पर खरीदारी की।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व की वजह से बाजार में राखियों के अलावा अन्य दुकानों में भी लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। बाजार में सामान्यता दो रुपए से लेकर 500 रुपए तक की राखियां मौजूद हैं। वहीं कुछ बहने सोने और चांदी की राखियां भी खरीद रही हैं। इन राखियों की कीमत एक हजार से लेकर 10 हजार तक है। हालांकि महंगी राखियों की खरीदारी करने वालों की संख्या सीमित है। इसके बाद भी सर्राफा की दुकानों पर लोग खरीदारी करते हुए नजर आ रहे हैं। ज्यादातर दुकानदारों ने इस मौके पर लाभ लेने के लिए अपने काउंटरों को अलग-अलग डिजाइनों की खूबसूरत राखियों से सजा दिया है।
श्रावण शुक्ल चतुर्दशीयुक्त पूर्णिमा पर 11 अगस्त को Raksha Bandhan का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर दिनभर भ्रदा का साया रहेगा, ऐसे में सिर्फ दो घंटा 8 मिनट का ही समय ही राखी बांधने के लिए मिलेगा। हालांकि भद्रा रात 8 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद रात 8 बजकर 52 मिनट से रात 9 बजकर 48 मिनट तक ही राखी बांधने का श्रेष्ठ समय रहेगा, इस बीच राखी बांधने का श्रेष्ठ मुहूर्त रात 8.52 से 9.15 बजे तक ही आएगा। ऐसे में राखी बांधने के लिए बहनों को कम समय मिलेगा। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का तर्क है कि भद्रा पुच्छ काल में शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक भी राखी बांधी जा सकेगी। ऐसे में राखी बांधने के लिए दो घंटा 8 मिनट का समय मिल पाएगा।
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन का पर्व अपराहन व्यापी व प्रदोष व्यापिनी भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाने का विधान है। 11 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 05 मिनट तक रहेगी। 12 अगस्त को पूर्णिमा तीन मुहूर्त्त से कम होने के कारण रक्षाबंधन त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा। शास्त्रों में उल्लेख है कि पूर्णिमा सूर्योदय से ढाई घंटे तक रहे तो उदयकालीन पूर्णिमा में यह पर्व मनाना चाहिए। 12 अगस्त को पूर्णिमा एक घंटे 6 मिनट तक ही है।
Published on:
10 Aug 2022 11:35 am
बड़ी खबरें
View Allबारां
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
