पंचाग के अनुसार पांचवा महीना श्रावण को माना जाता है। यह श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है। इसलिए इस माह में शिव आराधना करने का महत्व कहा गया है।
भगवान शिव की आराधना के पवित्र माह सावन की शुरूआत
विशेष संयोग में शिव पूजन रूद्राभिषेक का मिलेगा अनन्त फल
मांगरोल. श्रावण माह के शुरुआत की तैयारी हो गयी है। ङ्क्षहदी पंचाग के अनुसार पांचवा महीना श्रावण को माना जाता है। यह श्रावण मास शिवजी को विशेष प्रिय है। इसलिए इस माह में शिव आराधना करने का महत्व कहा गया है। ज्योतिषाचार्य पं. भानू शास्त्री ने बताया कि शिवपुराण के अनुसार शिवजी ने स्वयं श्रावण मास के बारे में बताया है।
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ: । श्रवणाहं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत:। श्रवणर्ष पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत: । यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत: ।।
अर्थात मासों में श्रावण मास मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका माहात्म्य सुनने योग्य है अत: इसे श्रावण कहा जाता है। इस मास में श्रवण नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होती है। इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है। ऐसे पवित्र श्रावण माह का आरम्भ 11 जुलाई से होगा है जो 9 अगस्त तक रहेगा। इस श्रावण माह के मध्य में चार सोमवार, गुरु पुष्य, अमृत-सर्वार्थ सिद्धि, द्विपुष्कर त्रिपुष्कर रवि योग सहित कई विशेष संयोग बनेंगे। इनमें शिव पूजा रुद्राभिषेक करने से अनन्त फल प्राप्त होगा। इन दिनों में शिवालयों में विशेष श्रृंगार पूजा अर्चना होगी। यह न केवल एक आध्यात्मिक अनुशासन है, बल्कि आयुर्वेदिक ज्ञान के अनुरूप भी है, जो आद्र्र मानसून के मौसम में पाचन में सहायता और बीमारियों से बचाव के लिए हल्के भोजन की सलाह देता है। ङ्क्षलग पुराण आदि ग्रन्थों में कहा गया है कि घर पर लकड़ी, धातु, मिट्टी, रेत, पारद, स्फटिक आदि के बने ङ्क्षलग पर अर्चना की जा सकती है।
श्रावण माह में बनने वाले संयोग
14 जुलाई प्रथम सोमवार
21 जुलाई द्वितीय सोमवार
28 जुलाई तृतीय सोमवार
04 अगस्त चतुर्थ सोमवार
21 जुलाई कामिका एकादशी
05 अगस्त पवित्रा एकादशी
15 जुलाई नागपंचमी
23 जुलाई मास शिवरात्रि
24 जुलाई हरियाली अमावस्या
22 जुलाई भौम प्रदोष
06 अगस्त प्रदोष,
24 जुलाई गुरुपुष्य अमृत योग
12 जुलाई त्रिपुष्कर योग
22 जुलाई द्विपुष्कर योग।
उपवास व अनुष्ठान
श्रावण सोमवार व्रत: सोमवार विशेष रूप से पवित्र होते हैं, इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रुद्र अभिषेक करते हैं। दूध, शहद और पवित्र जल से औपचारिक स्नान इसमें शामिल है।
मंगल गौरी व्रत: मंगलवार देवी पार्वती को समर्पित होते हैं, जहाँ महिलाएं वैवाहिक सुख और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
श्रावण के दौरान, कई ङ्क्षहदू शाकाहारी और सात्विक आहार अपनाते हैं। मांस, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों से परहेज करते हैं। ह•ाारों कांवडिय़े नंगे पैर गंगा जल लेकर शिव मंदिरों में चढ़ाने के लिए तीर्थयात्रा करते हैं।