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पार्वती नहर से छलकी थी हाड़ोती में सबसे पहले ‘खुशहालीÓ

यह उस जमाने की तकनीक का नायाब नमूना है, जब न तो विशेषज्ञ अभियंता थे और न ही नहरी तंत्र को विकसित करने के लिए पर्याप्त संसाधन थे। कोटा सीएडी का नहरी तंत्र भी देश की आजादी के बाद शुरू हुआ था।

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पार्वती नहर से छलकी थी हाड़ोती में सबसे पहले 'खुशहालीÓ

पार्वती नहर से छलकी थी हाड़ोती में सबसे पहले 'खुशहालीÓ

बारां. देश की आजादी से 65 बरस पहले बारां जिले में नहरी सिंचाई तंत्र शुरू हो गया था। 1882 में पार्वती नहर के रूप में शुरू यह तंत्र अब 141 वर्ष का हो गया है। पार्वती नदी के किशनपुरा बंधा से डायवर्जन प्रणाली से शुरू किए गए इस तंत्र से किशनगंज, बारां व मांगरोल तहसील के 57 गांवों की 12547 हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है। इसे तत्कालीन कोटा रियासत की पहली नहर होने का गौरव भी प्राप्त है। यह उस जमाने की तकनीक का नायाब नमूना है, जब न तो विशेषज्ञ अभियंता थे और न ही नहरी तंत्र को विकसित करने के लिए पर्याप्त संसाधन थे। कोटा सीएडी का नहरी तंत्र भी देश की आजादी के बाद शुरू हुआ था। हालांकि रियासतकालीन दौर में झालावाड़ के हरिश्चंद्र सागर से डीजल पम्प से पानी लिफ्ट कर नहरी तंत्र की शुरुआत हो गई थी। इसके लिए झालावाड़ के पूर्व शासक ने इंग्लैंड से डीजल पम्प मंगवाया था।पांच माह तक रहता है जल प्रवाह

इस नहर में मानसून सत्र के आगाज के साथ ही जलप्रवाह शुरू हो जाता है, जो नवम्बर माह तक सतत रूप से जारी रहता है। इससे किसानों को खरीफ के लिए तो पूरा पानी मिलता ही है, रबी के लिए भी पलेवा का बंदोबस्त हो जाता है। इस नहरी तंत्र से लाभान्वित किसान भरपूर पानी मिलने से धान की बुवाई व रोपाई को प्राथमिकता देते हैं। इस वर्ष जल संसाधन विभाग पार्वती नहर में 20 जुलाई से जलप्रवाह शुरू किया जाएगा।...............................

यह है पार्वती का नहरी तंत्र-वर्ष1882 में पार्वती नदी पर बंधा किशनपुरा पर डायवर्जन बनाकर नहर निकाली गई।

-शुरुआत में छोटा सिंचाई तंत्र तैयार किया गया, इसको कालांतर में बढ़ाया जाता रहा।-वर्ष 1941 में पिक-अप-वियर बनाकर मुख्य नहर का निर्माण किया गया, यह कच्ची नहर है।

-आवश्यकता व पानी की उपलब्धता के आधार पर इसका क्षेत्र बढ़ाया जाता रहा।-वर्तमान में 57 गांव बारां, अटरू व मांगरोल उपखंड क्षेत्र के इससे लाभांवित हो रहे हैं।

................................वर्तमान यह है नहरी तंत्र

-पार्वती नहरीतंत्र में वर्तमान में एक मुख्य नहर के अलावा एक ब्रांच, एक ड्रिस्टीब्यूटरी है-58 किमी लम्बाई में है पार्वती कैनाल की मुख्य नहर

- 26 किमी लम्बाई में है इसकी रजवाह ब्रांच-62 माइनर निकलते हैं इस नहर से

- 147 किमी है इनकी लम्बाई

- 12547 हैक्टेयर जमीन में इस नहरी तंत्र से खरीफ व रबी की फसलों के पलेवा के लिए किसानों को पानी उपलब्ध होता है

एक्सपर्ट व्यूबारां जिले की पार्वती नहर को तत्कालीन कोटा रियासत की पहली नहर होने का गौरव मिला है। इसकी खूबियों से लोग अचरज में पड़ जाते है। पार्वती नदी के किशनपुरा बंधा (कच्चा बांध) से इसका उद्गम होता है। आगे चलकर इसमें से रजवाह ब्रांच निकालने से सिंचाई का दायरा बढ़ गया है। जिले के इस पहले नहरी तंत्र से हजारों किसान परिवारों को संबल मिलता है। राज्य सरकार ने हाल ही में बड़ी राशि मंजूर की है। कई बरसों तक बारां में पदस्थ रहने से मैंने इस तंत्र का विस्तृत अध्ययन किया है। जरूरत, इसके उन हिस्सों के सारसंभाल की है, जो जल प्रवाह के दौरान दरक जाते है। इससे पानी का रिसाव भी होता है। इसके रुकने से किसानों का असमय होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। अब तक इस नहर का संचालन डायवर्जन सिस्टम से हो रहा है, लेकिन सिंचित क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए किशनपुरा बंधे की चौड़ाई बढा पानी को लिफ्ट भी किया जा सकता है। इससे किसानों को दोनों फसलों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

मनोज गोयल, अधीक्षण अभियंता, झालावाड़----------------

वर्जन-क्षेत्रीय विधायक पानाचंद मेघवाल के विशेष प्रयासों से जीर्ण-शीर्ण पार्वती कैनाल के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार ने बजट घोषणा के अनुरूप करोड़ों रुपए की राशि मिली है। अब नहर में जल प्रवाह बंद करने के बाद कई कार्य कराए जाएंगे। खासकर ऐसे 30 धोरों की मरम्मत कराई जाएगी, जिनसे पानी का रिसाव होता है।

बीआर वर्मा, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग खंड प्रथम बारां