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किसानों में बांस की खेती का रुझान, कम लागत में सालों तक शानदार कमाई देता है ये हरा सोना

Baran News: बांस के खेत का तापमान भी सामान्य तापमान से 10 से 15 डिग्री कम रहता है। बांस की पत्तियां गिरकर खेत में खाद में परिवर्तित हो जाती है। शुरूआत में दो साल तक छोटे पौधे रहने पर ड्रीप से सिंचाई की जाती है इसके बाद ड्रीप सिस्टम हटाकर धोरे बनाकर पानी दिया जाता है।

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Agriculture News: बांस को हरा सोना भी कहते हैं। अन्य फसलों की तरह बांस के खेत को बार-बार तैयार करने की नौबत नहीं आती है। इसे किसी खास देखरेख की भी जरूरत नहीं पड़ती। ये बहुत कम लागत में शानदार कमाई देता है। बांस को हरा सोना भी कहते हैं। अन्य फसलों की तरह बांस के खेत को बार-बार तैयार करने की नौबत नहीं आती है। इसे किसी खास देखरेख की भी जरूरत नहीं पड़ती। ये बहुत कम लागत में शानदार कमाई देता है। इसी का परिणाम है कि हाड़ौती सभाग में प्रगतिशील किसान और व्यापारी समूह बांस की खेती के प्रति रूझान बढ़ा है। अभी कोटा, झालावाड़ व बिजोलिया में बांस की खेती की जा रही है। अंता कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों के अनुसार हाड़ौती की जलवायु बांस की खेती के लिए अनुकूल है।

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बांस के खेत का तापमान भी सामान्य तापमान से 10 से 15 डिग्री कम रहता है। बांस की पत्तियां गिरकर खेत में खाद में परिवर्तित हो जाती है। शुरूआत में दो साल तक छोटे पौधे रहने पर ड्रीप से सिंचाई की जाती है इसके बाद ड्रीप सिस्टम हटाकर धोरे बनाकर पानी दिया जाता है। यही नहीं बांस की फसल की एक खासियत यह है कि यह किसी भी मौसम में खराब नहीं होता। बांस की फसल को एक बार लगाकर कई साल तक इससे उपज ली जा सकती है।

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कटाई के पहले साल प्रति एकड़ 40 से 50 टन वजन के बांस की पैदावार मिलती है। ज्यों-ज्यों बांस की उम्र बढ़ती है उसका आकार और वजन भी सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़ता जाता है। तीसरे साल की कटाई तक पैदावार 100 टन के आसपास तक पहुंच जाती है। साथ ही बांस के साथ अन्य फसलों की उपज भी ली जा सकती है।

डॉ डीके सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र , अंता


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