
एचआइवी संक्रमण के मामले में यह राज्य देश में तीसरे स्थान पर
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/बारां।
World AIDS Day: स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने को लेकर खासे प्रयास किए जाने के बावजूद कई लोग सचेत नहीं हो रहे हैं। जागरूकता की कमी के चलते कई लोग एड्स जैसी गंभीर जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बारां जिले में ही एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में पिछले कुछ वर्षो से तो औसतन हर माह चार नए एचआईवी संक्रमित मरीज चिन्हित किए जा रहे हैं।
इस वित्तीय वर्ष के बीते आठ माह में ही अब तक 39 एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं। लेकिन आज एक दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस पर लोगों को जागरूकता दिखाते हुए संक्रमित मरीजों से नहीं इस मर्ज से लडऩे का संकल्प लेना होगा। जिले में गर्भवती महिलाएं और युवा भी चपेट में आ रहे हैं।
खुशियों पर भारी स्वार्थ
सरकार की ओर से एड्स मुक्त भारत का निर्माण करने के लिए प्रयास किए जा रहे है और जागरूकता की कमी से लोग संक्रमण को अंगुठा दिखा रहे हैं। जिले में वर्ष 2006 से अब तक करीब 500 लोग पॉजिटिव मिल चुके है। हालांकि इनमें से कुछ की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन फिर भी यह आंकड़े यह बताने के लिए काफी है कि सेहत और परिवार की खुशियों पर व्यक्ति का खुद का ’स्वार्थ’ कितना भारी पड़ रहा है। दूसरी ओर से सरकार के स्तर पर भी प्रचार-प्रसार को लेकर उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षो से तो जिले में सरकार की ओर से समाज में जागरूकता लाने के लिए विश्व एड्स दिवस मनाने और रैली व गोष्ठी जैसे आयोजन पर भी ब्रेक लगाया हुआ है। पूर्व में इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान भी होता था।
जांच यहां, दवा कहां
सरकार की ओर से जिले में एचआईवी जांच के लिए तो सुविधा दी जा रही है, लेकिन पॉजिटिव मिलने के बाद मरीजों के लिए दवाइयों का यहां प्रबंध नहीं है। जिले में सभी सीएचसी, पीएचसी व उपजिला अस्पतालों में सुविधा आधारित जांच परामर्श केन्द्र (एफआईसीटीसी) पर मरीजों की स्क्रनिंग की सुविधा है। यहां स्क्रिीनिंग में प्रारम्भिक तौर पर चिन्हित होने के बाद मरीज को जिला अस्पताल के लिए रैफर किया जाता है।
जिला अस्पताल में एकीकृत जांच एवं परामर्श केन्द्र (आईसीटीसी) पर तीन स्तर की जांच कर कंफर्मेटिव टेस्ट किया जाता है। इसमें पॉजिटिव मिलने पर मरीज की दवा शुरू की जाती है। दवा के लिए संभाग स्तर पर व्यवस्था है। ऐसे में कई मरीज कोटा मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर पर जाने में उदासीनता बरतते हैं, तो नियमित उपचार नहीं मिलता है।
...इलाज भी नहीं है
चिकित्सकों का कहना है कि एचआईवी वायरस खून में जाकर सफेद रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। इससे संक्रमित व्यक्ति एक के बाद एक अन्य बीमारियों के चपेट में आता जाता है। शुरुआत में इसका इलाज करा लिया जाए तो व्यक्ति काफी हद तक इस बीमारी से बच सकता है। अंतिम स्टेज पर पहुंचने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।
Published on:
01 Dec 2022 03:22 pm
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