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पीलीभीत के जंगल में गई थी महिला, बाघ ने बना लिया अपना शिकार, कॉलोनी से 200 मीटर दूर मिला शव, जाने पूरा मामला

यूपी-उत्तराखंड सीमा के करीब बसे महोफ जंगल में बुधवार सुबह वह मंजर दिखा, जिसने ग्रामीणों की रूह कंपा दी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ वन रेंज में 65 वर्षीय पारुल राय का क्षत-विक्षत शव कॉलोनी से महज 200 मीटर दूर जंगल में पड़ा मिला।

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पीलीभीत। यूपी-उत्तराखंड सीमा के करीब बसे महोफ जंगल में बुधवार सुबह वह मंजर दिखा, जिसने ग्रामीणों की रूह कंपा दी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ वन रेंज में 65 वर्षीय पारुल राय का क्षत-विक्षत शव कॉलोनी से महज 200 मीटर दूर जंगल में पड़ा मिला। आशंका है कि झाड़ियों में घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक हमला किया, जबड़े में गला दबोचकर महिला को घसीटते हुए भीतर ले गया और मौत के घाट उतार दिया। मृतका पारुल राय महोफ कॉलोनी की निवासी थीं। मंगलवार दोपहर वह लकड़ी बीनने जंगल गई थीं। देर शाम तक घर न लौटने पर परिवार बेचैन हुआ। पति सुकुमार राय और परिजनों ने रात तक तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को सूचना दी गई।

बुधवार सुबह जंगल में मिला शव

बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे बग्गा बीट क्षेत्र में ग्रामीणों ने जंगल के भीतर शव देखा। खबर फैलते ही इलाके में सनसनी मच गई। कॉलोनी से इतनी नजदीकी पर शव मिलना अपने आप में बड़ी चेतावनी है। इसके बाद फॉरेस्ट की टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गयाहै।

गला टूटा, पेट नोचा… संघर्ष के सबूत बिखरे पड़े थे

मौके का मुआयना करने वालों ने जो देखा, वह खौफनाक था। महिला के पेट और गले का मांस गायब था। गले की हड्डी टूटी हुई मिली। शरीर पर गहरे पंजों के निशान थे। आसपास की झाड़ियां टूटी हुई थीं—मानो जिंदगी और मौत के बीच आखिरी जंग लड़ी गई हो। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से इलाके में बाघ की मूवमेंट दिख रही थी। मवेशियों पर हमले की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन ठोस निगरानी नहीं बढ़ाई गई।

वन विभाग की जांच, बाघ की पुष्टि

सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला वन्यजीव के हमले का लग रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारण स्पष्ट होंगे। फिलहाल आसपास बाघ के स्पष्ट पंजों के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि शरीर पर मिले घाव और मांस के गायब हिस्से किसी बड़े शिकारी के हमले की ओर इशारा कर रहे हैं।

सीमा क्षेत्र में फिर गहराया मानव-बाघ संघर्ष

यह इलाका यूपी-उत्तराखंड सीमा से सटा है और पहले भी मानव-बाघ संघर्ष के मामलों के लिए संवेदनशील रहा है। कई बार बाघ का मूवमेंट आबादी के करीब दर्ज किया जा चुका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गश्त और ट्रैकिंग की व्यवस्था कागजों में ज्यादा दिखती है, जमीन पर कम। घटना के बाद महोफ कॉलोनी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। महिलाएं और बुजुर्ग अब अकेले जंगल जाने से डर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाने, गश्त बढ़ाने और मुआवजा प्रक्रिया तेज करने की मांग की है।