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बरेली में 18 हजार की रिश्वत ने हिला दिया बिजली विभाग, संविदाकर्मी बाहर, जेई सस्पेंड

बिजली विभाग ने भी सख्त रुख अपनाते हुए संविदाकर्मी को सेवा से बाहर करने और संबंधित अवर अभियंता जितेंद्र केसरवानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

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Bareilly electricity bribery case, JE suspended after ₹18,000 bribe action.

प्रतिकात्मक चित्र

बरेली। बिजली विभाग में रिश्वतखोरी के मामले में हुई बड़ी कार्रवाई ने पूरे महकमे में खलबली मचा दी है। प्रेमनगर क्षेत्र के एक उपभोक्ता से बिजली कनेक्शन चालू कराने के नाम पर 18 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में संविदाकर्मी मो. अनस कादरी को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद बिजली विभाग ने भी सख्त रुख अपनाते हुए संविदाकर्मी को सेवा से बाहर करने और संबंधित अवर अभियंता जितेंद्र केसरवानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

जानकारी के मुताबिक प्रेमनगर इलाके के एक उपभोक्ता से बिजली कनेक्शन दोबारा चालू कराने के बदले 18 हजार रुपये मांगे गए थे। उपभोक्ता ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन से कर दी। शिकायत के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और संविदाकर्मी मो. अनस कादरी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के तुरंत बाद एंटी करप्शन टीम ने थाना बारादरी में मुकदमा दर्ज कराया। मामले में अवर अभियंता जितेंद्र केसरवानी का नाम सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया।

अधीक्षण अभियंता ने दिखाई सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षण अभियंता शहर धर्मेंद्र सिंह ने बिना देरी किए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। कामर्शियल द्वितीय वर्टिकल में तैनात अवर अभियंता जितेंद्र केसरवानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि संविदाकर्मी अनस कादरी को सेवा से निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए गए। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए विभागीय समिति भी गठित कर दी गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

बिजली विभाग में मची बेचैनी

बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से उपभोक्ताओं में नाराजगी रही है। कनेक्शन, बिल संशोधन और मीटर संबंधी कार्यों में सुविधा शुल्क मांगने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में इस बार विभागीय स्तर पर हुई त्वरित कार्रवाई को बड़ा संदेश माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अधीक्षण अभियंता शहर ने साफ संकेत दे दिया है कि उपभोक्ताओं का शोषण करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अब किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे। यही वजह है कि कार्रवाई के बाद बिजली विभाग के दफ्तरों में अचानक सतर्कता बढ़ गई है।

शहर में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

रिश्वत कांड के बाद हुई कार्रवाई अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर के लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह जवाबदेही तय होती रही तो वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे बिजली विभाग की छवि में सुधार आ सकता है। वहीं विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि आने वाले दिनों में भ्रष्टाचार से जुड़े कई और मामलों की परतें खुल सकती हैं।