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Bareilly Tourism: बरेली का अहिच्छत्र बनेगा महाभारत सर्किट की पहचान, पर्यटन विकास के लिए 2 करोड़ मंजूर

Bareilly Tourism 2025: उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को महाभारत सर्किट अंतर्गत विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ यह स्थल धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। यहाँ महाभारत कालीन इतिहास, जैन और बौद्ध धरोहर का संगम देखने को मिलेगा।

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बरेली

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Ritesh Singh

Sep 06, 2025

बरेली को मिला बड़ा तोहफा : महाभारत सर्किट अंतर्गत अहिच्छत्र के विकास को मंजूरी (फोटो सोर्स : Social Media / Whatsapp )

बरेली को मिला बड़ा तोहफा : महाभारत सर्किट अंतर्गत अहिच्छत्र के विकास को मंजूरी (फोटो सोर्स : Social Media / Whatsapp )

Ahichhatra to Shine on Mahabharata Circuit: उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को नई उड़ान देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शनिवार को जानकारी दी कि बरेली जिले के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को महाभारत सर्किट अंतर्गत विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बरेली धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित होगा तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की विशिष्ट पहचान बनेगी।

महाभारत काल से जुड़ा है अहिच्छत्र

अहिच्छत्र का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। प्राचीन ग्रंथों में इसे उत्तर पांचाल की राजधानी बताया गया है। महाभारत कालीन इतिहास से जुड़े इस नगर ने समय-समय पर अनेक राजवंशों का शासन देखा है। द्वापर युग के बाद यहाँ पर गुप्त, पाल और सेन राजाओं का भी आधिपत्य रहा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “अहिच्छत्र एक ऐसा स्थल है जो हर युग में गौरवशाली रहा है। हमारी सरकार का उद्देश्य इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर पर्यटन मानचित्र पर इसकी विशिष्ट पहचान स्थापित करना है।”

जैन और बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र

  • अहिच्छत्र केवल हिंदू धर्म से ही नहीं, बल्कि जैन और बौद्ध अनुयायियों के लिए भी पवित्र स्थल माना जाता है।
  • जैन परंपरा के अनुसार, यहीं पर 23वें जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
  • बौद्ध ग्रंथों के अनुसार, भगवान बुद्ध भी यहाँ पधारे थे और उन्होंने नाग राजाओं को धर्म दीक्षा दी थी। कहा जाता है कि बुद्ध ने यहाँ सात दिन प्रवास किया और उपदेश दिए।
  • मौर्य सम्राट अशोक ने अहिच्छत्र में कई बौद्ध स्तूपों का निर्माण कराया था।
  • चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा वृतांत में अहिच्छत्र के विशाल बौद्ध विहारों का उल्लेख किया है।

पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

अहिच्छत्र की पुरातात्विक खुदाई 19वीं और 20वीं शताब्दी में होती रही। इन उत्खननों में अनेक दुर्लभ और बहुमूल्य अवशेष मिले हैं, जिनसे यह सिद्ध होता है कि प्राचीन समय में यह नगर एक समृद्ध व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। खुदाई से प्राप्त वस्तुएं आज देशभर के अलग-अलग संग्रहालयों में संरक्षित हैं। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने अहिच्छत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है।

पर्यटन विकास की योजनाएं

  • पर्यटन विभाग के अनुसार, विकास योजना में निम्न सुविधाओं का निर्माण और संवर्धन किया जाएगा :
  • भव्य प्रवेश द्वार
  • सम्पूर्ण क्षेत्र का सौंदर्यीकरण
  • आधुनिक प्रकाश व्यवस्था
  • शौचालय और पेयजल सुविधाएँ
  • सूचना केंद्र
  • विश्राम स्थल और सुविधा केंद्र
  • इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और अहिच्छत्र की यात्रा अधिक सहज व आकर्षक बनेगी।
  • बरेली में बढ़ रहा पर्यटक आगमन
  • बरेली पिछले कुछ वर्षों से पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
  • वर्ष 2024 में यहाँ 1 करोड़ 15 लाख से अधिक पर्यटक आए थे।
  • वर्ष 2025 के पहले तीन महीनों (जनवरी से मार्च) में ही 28 लाख 61 हजार से अधिक सैलानी बरेली पहुँचे।
  • पर्यटन विभाग का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक यह आँकड़ा 1.25 करोड़ तक पहुँच सकता है।

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “पर्यटन के बढ़ते आँकड़े स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। बरेली को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता है।”

अहिच्छत्र का किला-प्राचीन वैभव का साक्षी

बरेली मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर आंवला तहसील के रामनगर क्षेत्र में स्थित अहिच्छत्र का किला आज भी उस दौर के वैभव और स्थापत्य कला का साक्षी है। इसकी भव्यता और वास्तुकला हर आगंतुक को आकर्षित करती है।

सभी धर्मों का संगम

बरेली को “धार्मिक पर्यटन का संगम” कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहाँ हिन्दू, जैन और बौद्ध , सभी धर्मों से जुड़े पवित्र स्थल मौजूद हैं। सरकार का प्रयास है कि इन स्थलों को विकसित कर उत्तर प्रदेश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाया जाए। पर्यटन मंत्री ने कहा, “धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश निरंतर अग्रणी बन रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा के साथ अब बरेली का अहिच्छत्र भी महाभारत सर्किट की विशिष्ट पहचान बनेगा।”

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