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‘औरत की गैरमौजूदगी में दिया गया तलाक भी जायज’

तलाक को लेकर दारुल इफ्ता का नया फतवा जारी हुआ है। इस फतवे में कहा गया है कि तलाकनामे पर औरत के दस्तखत भी जरूरी नहीं।

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Amit Sharma

Dec 31, 2016

talaq

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बरेली।
तीन तलाक के मामले में मरकजी दारुल इफ्ता ने नया फतवा जारी किया है। दारुल इफ्ता में सवाल डाला गया था कि क्या महिला की गैरमौजूदगी में दिया गया तलाक इस्लाम में जायज़ है या नहीं? इस पर दारुल इफ्ता ने फतवा जारी कर कहा है कि तलाक देते वक़्त अगर औरत मौजूद नहीं है तब भी महिला का अपने पति से तलाक हो जाएगा इसमें महिला की रज़ामंदी या कागज़ात पर उसके दस्तखत मायने नहीं रखते।


सीबीगंज के रहने वाले मोहम्मद बख्तियार खान ने दारुल इफ्ता से सवाल पूछा था कि क्या तलाक होने के लिए औरत का सुनना या मौजूद होना जरूरी है अथवा उसका दस्तखत करना जरूरी है। जबकि शौहर तीन तलाक देने का इकरारी है और औरत तलाक मानने को राजी नहीं है, इस सूरत में शरीयत का क्या हुक्म है।




तलाकनामे पर औरत के दस्तख़त भी जरूरी नहीं

सवाल के जवाब में दारुल इफ्ता के मुफ़्ती कौसर अली ने कहा कि बीबी को तीन तलाक देने का अधिकार शौहर को है। बीबी को खुला का अधिकार शरीयत में दिया गया है। औरत को तलाक का शब्द सुनना या उस वक्त वहां मौजूद होना जरूरी नहीं है। तलाकनामे पर औरत का दस्तखत करना भी जरूरी नहीं है।


मामला पहुंचा कोर्ट

दारुल इफ्ता से ट्रिपल तलाक को लेकर यह फतवा उस वक़्त जारी हुआ है। आलाहज़रत के खानदान की बहू निदा खान का उनके पति शीरान रज़ा खान के साथ तलाक का मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। जिसमें शीरान रज़ा खान ने कोर्ट में अपनी पत्नी को तलाक दिए जाने के दस्तावेज दाखिल किए वहीं उनकी पत्नी का कहना है कि उनकी मौजूदगी में तलाक हुआ ही नहीं।


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