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नोटबंदी का एक साल, बरेली के जरी कारीगर आज भी बेहाल

नोटबंदी के एक साल बाद भी बरेली का जरी उद्योग उभर नहीं पाया है।

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बरेली

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Mukesh Kumar

Nov 08, 2017

zari industry of bareilly

zari industry of bareilly

बरेली। नोटबंदी को आज एक साल पूरे हो रहे हैं। आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए थे। नोटबंदी का असर बरेली के प्रसिद्ध जरी उद्योग पर भी पड़ा। इस काम में लगे तमाम कारीगर बेरोजगार हो गए। एक साल बाद भी नोटबंदी का असर से ये उद्योग उभर नहीं पाया है। छोटे कारीगर और व्यापारियों पर अभी भी नोटबंदी का असर देखने को मिल रहा है।


जरी उद्योग को हुआ काफी नुकसान
दस्तकार-बुनकर एसोशिएसन के अध्य्क्ष मुख्तार अंसारी का कहना है कि नोटबंदी से जरी उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। नोटबंदी के बाद माल की डिमांड कम हो गई। जिसके कारण तमाम जरी कारीगर बेरोजगार हो गए या दूसरा काम करने लगे। दीपावली से काम मे कुछ सुधार आया है। अब शादी का सीजन आ रहा है तो हालात कुछ सुधरने के हालात हैं लेकिन छोटे कारीगर अभी भी बेहाल हैं इनके लिए सरकार कुछ करना चाहिए।


नोटबंदी के बाद अब जीएसटी की मार
किसी जमाने मे बरेली का जरी उद्योग विश्व प्रसिद्ध था और यहां से कपड़े विदेशों में भी सप्लाई किए जाते थे लेकिन इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से कोई सार्थक पहल नहीं की गई। जिसके कारण ये उद्योग बदहाली की कगार पर पहुंच गया। पिछले साल हुई नोटबंदी से इस उद्योग से जुड़े लोगों की कमर तोड़ दी। नोटबंदी के झटके से ये उद्योग उभर नहीं नहीं पाया था कि जीएसटी ने जरी के काम को तबाह कर दिया। जिसके कारण इससे जुड़े छोटे कारीगर और व्यापारी परेशान है।


सरकार को करनी होगी पहल
जरी उद्योग को संजीवनी देने के लिए सरकार को पहल करनी होगी और इस जाम से जुड़े कारीगरों और व्यापारियों के लिए कोई पैकेज की घोषणा करनी होगी। जिससे बदहाल हो चुके इस उद्योग को पंख लग सके।

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