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बरेली। इस वर्ष धनतेरस का पर्व पांच नवंबर सोमवार को मनाया जाएगा। इस बार सोमवार को हस्तनक्षत्र , सोम प्रदोष में धनतेरस होना काफी शुभ माना जा रहा है। इस दिन चुर्तमास की समाप्ति होगी, हस्तनक्षत्र रात्रि 8ः37 बजे तक रहेगा एवं त्रियोदशी तिथि पूरे दिन रहेगी। बाला जी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था, भगवान धनवन्तरि आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वन्तरि इसी दिन समुद्र से हाथ में अमृत कलश लिये प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को धन्वन्तरि जयंती भी कहा जाता है धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के पूजन से बीमारियां पास नहीं आती है और परिवार निरोग रहता है। इनके पूजन से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।
धन्वन्तरि जयंती मनाने की विधि
निरोग और परिवार में सुख समृद्धि के लिए सुबह धन्वंतरि का पूजन करें जिसके लिए प्रातःकाल शरीर पर तेल लगाकर, स्नान करके भगवान, धन्वन्तरी का ध्यान एवं पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम चैकी पर स्वच्छ पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर भगवान धन्वन्तरि जी की का चित्र स्थापिता कर रोली, मोली, अक्षत्र, चन्दन आदि से उनका पूजन करना चाहिए, पुष्प माला पहनाकर ऊँ रं रूद्र रोगनाशय धन्वन्तयै फट् मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान धन्वन्तरि से आरोग्य की प्रार्थना करना चाहिए।
अन्त में धूप, दिखाकर भगवाान धन्वन्तरि की आरती उतारें, ऐसा करने से साधक को आरोग्य की प्राप्ति होती है।
धनतेरस पर पूजा के शुभ मुहूर्त
धन्वंतरि पूजा के लिए प्रातः काल 09ः18 बजे से 10ः45 बजे तक शुभ के चैघड़िया मुहुर्त में रहेगा।
बर्तन एवं आभूषण क्रय मुहुर्त अपराह्न 2ः47 बजे से 04ः19 बजे तक लाभ के चैघड़िया मुहुर्त में शुभ रहेगा।
यम दीप दान मुहुर्त सायं काल 5ः32 से 6ः45 बजे तक प्रदोश कलाल निशा मुख में शुभ रहेगा। कुबेर पूजन मुहुर्त रात्रि काल में शुभ रहेगा।
Updated on:
3 Nov 2018, 6:01 AM IST
Published on:
3 Nov 2018, 6:01 AM IST
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