
बरेली शहर की प्राकृतिक आपदा से रक्षा करते हैं देवालय, पढ़िए 10 प्रसिद्ध मंदरों के बारे में रोचक जानकारी
बरेली। लखनऊ और दिल्ली के मध्य पड़ने वाला बरेली शहर वैसे तो अपनी तमाम विशेषताओं के कारण जाना जाता है लेकिन इस शहर को यहाँ स्थापित प्रसिद्ध मंदिर भी पहचान दिलाते है। नगर की सभी दिशाओं में प्राचीन शिव मंदिर होने के कारण बरेली को नाथ नगरी भी कहा जाता है। ये प्राचीन देवालय नगर की सुरक्षा चौकियां मानी जाती हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से शहर की रक्षा करती हैं। इसके साथ ही हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक लक्ष्मी नारायण का मंदिर भी शहर में है जिसे चुन्ना मियां का मंदिर भी कहा जाता है। सुभाषनगर इलाके में स्थापित 84 घंटा मंदिर भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है यहाँ पर चढ़ाए गए हजारों घंटे बताते हैं कि इस मंदिर में लोगों की कितनी आस्था है। साहूकारा मोहल्ले में स्थापित नवदुर्गा मंदिर भी भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है यहाँ पर एक साथ नौ देवियों के स्वरूप के दर्शन होते हैं।
1 - बनखंडिनाथ मंदिर
जोगीनवादा इलाके में स्थित बनखंडी नाथ मंदिर पूरब दिशा में बना हुआ है। महारानी द्रोपदी ने अपने गुरु के आदेश पर यहाँ पर शिवलिंग स्थापित कर तप किया था। सघन वन ने होने के कारण इस देवालय का नाम बनखंडिनाथ मंदिर पड़ा।
2- मढ़ीनाथ मंदिर
मढ़ीनाथ मोहल्ले में बना मढ़ीनाथ मंदिर नगर की पश्चिम दिशा में बना हुआ है। एक तपस्वी ने राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए यहाँ पर कुआँ खुदवाना शुरू किया तभी यहाँ शिवलिंग प्रकट हुआ जिस पर मढ़ीधारी सर्प लिपटा हुआ था इसी कारण दिव्य स्थान का नाम मढ़ीनाथ पड़ा।
3- त्रिवटीनाथ मंदिर
प्रेमनगर इलाके में स्थित त्रिवटीनाथ मंदिर नगर की उत्तर दिशा में स्थित है। इस मंदिर की स्थापना 1474 ईस्वी में मानी जाती है। इस स्थान पर तीन वृक्षों के नीचे सो रहे चरवाह को स्वप्न आया जिसके बाद जब यहाँ खुदाई की गई तो त्रिवट के नीचे शिवलिंग प्रकट हुआ तीन वृक्षों के नीचे होने के कारण इस मंदिर नाम त्रिवटीनाथ मंदिर पड़ा।
4- तपेश्वरनाथ मंदिर
नगर की दक्षिण दिशा में सुभाषनगर में स्थित तपेश्वरनाथ मंदिर ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है। कई साधू संतों ने यहाँ तपस्या कर इस देवालय को सिद्ध किया है। इसी कारण ये स्थान तपेश्वरनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।
5- धोपेश्वरनाथ मंदिर
नगर की पूर्व दक्षिण अग्निकोण में धोपेश्वरनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर को महाराजा द्रोपद के गुरु एवं अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र ऋषि ने कठोर तप कर सिद्ध किया। उनकी समाधि पर ही शिवलिंग की स्थापना हुई। उन्ही के नाम पर इस देवालय का नाम धूमेश्वरनाथ पड़ा जो बाद में धोपेश्वरनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
6- अलखनाथ मंदिर
नगर के वायव्य कोण पर किला इलाके में अलखनाथ मंदिर स्थित है। सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए और हिन्दुओं के जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए आनंद अखाड़े के अलखिया बाबा ने इस स्थान पर कठोर तप कर शिव भक्ति की ऐसी अलख जगाई कि मुस्लिम कटटरपंथियों को उनके आगे घुटने टेकने पड़े और इस मंदिर का नाम अलखनाथ मंदिर पड़ा।
7- पशुपतिनाथ मंदिर
नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मन्दिर की तरह ही बरेली में भी पशुपतिनाथ जी का मन्दिर है। जिसमे रोजाना भक्त दर्शन के लिए आते है और अपनी मनचाही मुरादें पूरी करते है। सावन के महीने में इस मन्दिर में कुछ ज्यादा ही भीड़ होती है।पीलीभीत रोड पर स्थित इस मन्दिर में भी पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है।
इस मन्दिर का निर्माण प्रॉपर्टी का काम करने वाले जगमोहन ने 2003 में कराया था। नेपाल की तर्ज पर यहां भी मुख्य मंदिर का निर्माण कराया गया है।इस मन्दिर में भगवान शिव के 108 नामों को समर्पित 108 शिवलिंग है।
8- नवदुर्गा मंदिर
शहर के साहूकारा मोहल्ले में स्थापित नवदुर्गा मंदिर भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। गोरक्षधाम आश्रम से जुडे़ होने के कारण यह विशिष्ट स्थान रखता है। मान्यता है कि ब्रह्मलीन महंत काशीनाथ एक दिन साहूकारा स्थित भैरो मंदिर में विश्राम कर रहे थे। तभी मां दुर्गा ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर नौ देवियों की स्थापना कराने के लिए कहा। इसके बाद 1965 में उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था। 14 दिनों तक मंदिर में एक पैर खडे़ रहकर उन्होंने तपस्या की। बसंत पंचमी के दिन मंदिर के कपाट खोले गए। तभी से बसंत पंचमी को मंदिर का वार्षिकोत्सव मनाया जाता है।
9- 84 घंटा मंदिर
सुभाषनगर के बदायूं रोड पर स्थित 84 घन्टा मंदिर चमत्कारी मन्दिर माना जाता है और यहां पर दर्शन मात्र से ही सभी लोगों की मन की मुरादें पूरी होती है इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर मुराद पूरी होने पर भक्त मन्दिर में घन्टा चढाते है और इस समय मन्दिर में एक लाख से भी ज्यादा घंटे चढ़ाए जा चुके हैं। इस मंदिर का निर्माण 1969 में किया गया था।
10- चुन्ना मियां का मंदिर
शहर के कटरा मानराय मोहल्ले में बना चुन्ना मियां का मंदिर हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना हुआ है। लक्ष्मी नारायण के इस मंदिर का निर्माण मुस्लिम सेठ चुन्ना मियां ने करवाया था। 16 मई 1960 में बनकर तैयार हुए इस मंदिर का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने किया था। वैसे तो ये भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर है लेकिन इसे चुन्ना मियां के मंदिर के नाम से ही जाना जाता है।
Published on:
12 Aug 2019 01:00 pm
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