
बरेली। आपकी जिंदगी के बाद भी आपके शरीर के अंग और आंखें किसी और के काम आ सकें इससे अच्छा कुछ नहीं है। मरने के बाद दूसरों को बेहतर जिंदगी जीने का मौका देने के लिए बरेली के ये अच्छी पहल की है सिल्वर लॉ कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नूपुर गोयल और उनके परिवार ने। अंगदान और नेत्रदान का फैसला लेने वाली नूपुर गोयल का कहना है कि मरने के बाद तो हमारा शरीर नष्ट ही हो जाता है क्यों न मरने के बाद भी हमारा शरीर जरूरतमंद लोगों के काम आए इसके लिए उन्होंने और उनके परिवार ने अंगदान और नेत्रदान करने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद नूपुर गोयल ने और भी लोगों को अंगदान और नेत्रदान करने को प्रेरित करने के लिए एक क्लब बनाने का फैसला लिया है जिसमें वो शहर के अन्य लोगों को भी जोड़ेंगी।
बचपन में लिया संकल्प
अंगदान, देहदान और नेत्रदान का फैसला लेने वाली डॉक्टर नूपुर गोयल ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही ये फैसला ले लिया था। इंटर में पढ़ाई के दौरान उनकी कॉलेज की प्रयोगशाला में एक कंकाल रखा हुआ था जिसको देखकर उन्हें इसकी प्रेरणा मिली। उनका कहना है कि वो कंकाल भी किसी का होगा तो वो क्यों नहीं ऐसा कर सकती हैं। जिसके बाद से ही उन्होंने अपना शरीर और आंखें दान करने का फैसला ले लिया था। नूपुर का कहना है कि इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता है कि आपके जाने के बाद आपकी आंखों से कोई दुनिया देख सके, मेडिकल के स्टूडेंट पढ़ाई कर सकें और जरूरतमंद लोगों को आपके अंग मिल सकें।
परिवार का मिला सहयोग
नूपुर की इस सराहनीय पहल में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। नूपुर का कहना है कि उनके परिवार के लोगों ने उनका बहुत सहयोग किया है इतना ही नहीं उनके साथ ही परिवार के चार अन्य सदस्यों मां ऊषा गोयल, भाई अतुल कुमार, भाभी उमा गोयल और भतीजे निशांत गोयल ने भी अंगदान और नेत्रदान करने का फैसला लिया है।
बनाया अंगदान क्लब
डॉक्टर नूपुर गोयल और उनके परिवार अन्य लोगों को जोड़ने के लिए एक क्लब का गठन भी किया है जिसमें अब तक 25 लोग जुड़ चुके हैं जिन्होंने अपने अंगदान नेत्रदान और देहदान करने का फैसला लिया है। इसके लिए उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 8979277677 और 9837991621 भी जारी किया हुआ है जिस पर फोन कर लोग अंगदान और नेत्रदान से जुड़ी जानकारी ले सकतें हैं।
Published on:
22 Apr 2018 11:58 am
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