
दरगाह आला हजरत (फोटो सोर्स: पत्रिका)
बरेली। इस्लामी दुनिया के महान आलिम और फाजिले-बरेलवी इमाम अहमद रजा खां ‘आला हजरत’ का इल्मी योगदान सिर्फ मजहबी मसलों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विज्ञान, गणित और खगोलशास्त्र में भी ऐसी मिसालें छोड़ीं, जिन्हें आज भी विद्वान सलाम करते हैं। सन 1906 में आला हजरत ने 280 पन्नों की अनूठी किताब लिखी, जिसमें काबा शरीफ की दिशा (किबला) निकालने का ऐसा फार्मूला दर्ज है, जो उस दौर के मुसलमानों के लिए बड़ी रहनुमाई साबित हुआ।
मुफ्ती सलीम नूरी के मुताबिक आला हजरत ने इस किताब में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत एशिया के कई शहरों के साथ दुनिया के अन्य देशों से भी काबा की दिशा का पूरा हिसाब दर्ज किया। इतना ही नहीं, समुद्री रास्तों से देशों की दूरी और दिशा तक विस्तार से बताई गई।
दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि नमाज की अदायगी के लिए काबा की सही दिशा मालूम होना जरूरी है। इसी जरूरत को देखते हुए आला हजरत ने गणित और खगोल विज्ञान को जोड़कर ऐसी तालिका बनाई, जिसे आम इंसान भी आसानी से समझ सके।
आला हजरत की यह किताब सिर्फ उस दौर के मुसलमानों के लिए रहनुमा नहीं रही, बल्कि आज भी शोधकर्ताओं और उलेमा के लिए मिसाल है। दुनियाभर के विद्वान उनके इस काम को इल्म और खगोल विज्ञान का बेहतरीन संगम मानते हैं।
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Published on:
20 Aug 2025 12:04 pm
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