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जानिए सपा-बसपा गठबंधन टूटने की बड़ी वजह

लोकसभा चुनाव में गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया और बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसके लिए सपा के बेस वोट बैंक यादवों को जिम्मेदार बताते हुए विधानसभा के उपचुनाव में अकेले लड़ने का एलान कर दिया है।
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बरेली

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jitendra verma

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Updated: 5 Jun 2019, 12:26 PM IST

बरेली। लोकसभा चुनाव में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए इस बार प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों समाजवादी पार्टी और बसपा ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था लेकिन गठबंधन के बाद भी ये दोनों विपक्षी दल भाजपा को नहीं रोक पाए और भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बना ली। लोकसभा चुनाव में गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया और बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसके लिए सपा के बेस वोट बैंक यादवों को जिम्मेदार बताते हुए विधानसभा के उपचुनाव में अकेले लड़ने का एलान कर दिया है। अगर बात करें बरेली मंडल की तो यहाँ पर बसपा ने आंवला और शाजहांपुर की सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और दोनों पर ही ही उसे हार का सामना करना पड़ा। दोनों ही सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी को 2014 के चुनाव की तुलना में कम वोट मिले यानि की 2014 में सपा और बसपा को जितना वोट मिला था उतना वोट भी गठबंधन के प्रत्याशी यानि बसपा के प्रत्याशी को नहीं मिले।कुछ यही हाल बदायूं सीट का भी रहा जहाँ पर धर्मेंद्र यादव को पिछले चुनाव से भी कम वोट मिले और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यानि की यहाँ पर दोनों ही दल अपना वोट एक दूसरे को ट्रांसफर कराने में विफल रहें और भाजपा ने दोनों ही दलों के वोट बैंक में जमकर सेंध लगाई और मंडल की सभी पांच सीटों पर कब्जा जमाया।

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आंवला में कभी नहीं जीती बसपा

2014 के चुनाव में आंवला में समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर थी बावजूद इसके ये सीट बसपा के खाते में गई। 2014 के चुनाव में सपा-बसपा को यहाँ कुल 4,61,678 वोट मिले थे जबकि इस बार के चुनाव में यहाँ पर बसपा प्रत्याशी को पिछले बार के कुल वोट से कम 4,23,932 वोट ही मिले। जबकि भाजपा के वोट प्रतिशत में जबरदस्त इजाफा हुआ। भाजपा को जहाँ 2014 के चुनाव में 41.16 प्रतिशत वोट मिले थे वहीँ इस बार के चुनाव में भाजपा को 51.07 प्रतिशत वोट मिले। यानि की आंवला में सपा का वोट बसपा को पूरी तरह से ट्रांसफर नहीं हुआ और बसपा के वोट बैंक में भी भाजपा ने सेंध लगाई। जिसके कारण भाजपा करीब 10 प्रतिशत ज्यादा वोट हासिल कर पाई।

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शाजहांपुर का भी यही हाल

शाजहांपुर सीट पर 2014 में बसपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर था और इस बार के चुनाव में ये सीट बसपा के खाते में गई थी और बसपा प्रत्याशी को 420572 वोट मिले जबकि पिछले चुनाव में सपा-बसपा को कुल 5,32,516 वोट मिले थे जबकि भाजपा को 5,25,132 वोट मिले थे यानि की 2014 के चुनाव में गठबंधन को भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे और गठबंधन को उम्मीद थी कि ये सीट उनके खाते में जाएगी लेकिन 2019 के चुनाव में भाजपा ने यहाँ पर मंडल की सबसे बड़ी जीत हासिल की और भाजपा के वोट प्रतिशत में करीब 12 प्रतिशत का इजाफा हुआ। पिछले चुनाव में भाजपा को 46.45 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे और इस बार भाजपा को 58.09 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

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1996 के बाद सपा को मिली हार

अगर समाजवादी पार्टी के लिहाज से देखें तो उसे सबसे तगड़ा नुकसान अपनी परम्परागत सीट बदायूं पर हुआ और यहाँ पर अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव चुनाव हार गए। धर्मेंद्र यादव को पिछले चुनाव से भी कम वोट हासिल हुए। धर्मेंद्र यादव को इस बार 4,92,898 वोट हासिल हुए जबकि पिछले चुनाव में धर्मेंद्र यादव को 4,98,378 वोट मिले थे। 2014 में बसपा को बदायूं में 1,56,973 वोट मिले थे। लेकिन इस बार के चुनाव में सपा को पिछले चुनाव से भी कम वोट मिले अगर इस बार के चुनाव में बसपा के पिछले चुनाव में मिले वोट को जोड़ दिया जाए तो धर्मेंद्र यादव यहाँ से चुनाव जीत जाते लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने दोनों ही पार्टियों के वोटों में जबरदस्त सेंध लगाई। भाजपा को 2014 के चुनाव में 32.31 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे जबकि इस बार भाजपा को 45.59 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

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