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मरीज की मौत पर देव प्राइमस अस्पताल में हंगामा, 41 हजार का बिल देख भड़का परिवार, पहुंची पुलिस

पीलीभीत बाईपास रोड स्थित देव प्राइमस अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली के आरोपों ने मंगलवार को बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। सड़क हादसे में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन परिजनों का गुस्सा तब फूट पड़ा जब अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद 41 हजार रुपये से ज्यादा का बिल थमा दिया।

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Family protests at Dev Primus Hospital after patient death in Bareilly.

मृतक के परिजन और देव प्राइमस अस्पताल का

बरेली। पीलीभीत बाईपास रोड स्थित देव प्राइमस अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली के आरोपों ने मंगलवार को बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। सड़क हादसे में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन परिजनों का गुस्सा तब फूट पड़ा जब अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद 41 हजार रुपये से ज्यादा का बिल थमा दिया। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए।

पीलीभीत जिले के बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव सेमारिया ताराचंद निवासी विरेश कुमार सोमवार को बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक एक मैजिक वाहन से टकरा गई। हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें आनन-फानन में बरेली के पीलीभीत बाईपास रोड स्थित 100 फुटा तिराहा के पास देव प्राइमस अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही इलाज शुरू हुआ और कुछ ही देर में भारी भरकम बिल बनना शुरू हो गया। परिवार का आरोप है कि विरेश कुमार आयुष्मान योजना के पात्र थे और उनका कार्ड भी मौजूद था, इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन लगातार पैसे जमा कराने का दबाव बनाता रहा। मंगलवार सुबह तक बिल 41 हजार रुपये से अधिक पहुंच गया। इसी बीच इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।

मौत के बाद अस्पताल में मचा हंगामा

जब परिजनों ने बिल देखा तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। परिवार के लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि गरीब मरीजों को आयुष्मान योजना के नाम पर भर्ती तो कर लिया जाता है लेकिन बाद में उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने भी अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत का डर दिखाकर मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया जाता है और फिर जांच, दवा और अन्य खर्चों के नाम पर लगातार रकम बढ़ाई जाती है। उनका कहना था कि अगर आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी गरीबों को हजारों रुपये देने पड़ें तो फिर इस योजना का फायदा क्या है।

अस्पताल के एमडी के पत्र ने मचाया हड़कंप

देव प्राइमस अस्पताल का विवाद उस समय और गहरा गया जब अस्पताल के एमडी डॉ. मनीष गोयल की ओर से मंडलायुक्त भूपेंद्र एस चौधरी और सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह को भेजा गया शिकायती पत्र सामने आया। पत्र में अस्पताल के भीतर आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से अवैध वसूली, आईसीयू में भर्ती कर अतिरिक्त रकम लेने और गंभीर मरीजों से पैसे ऐंठने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि अस्पताल में कई मरीजों से उपचार और अन्य सेवाओं के नाम पर अवैध रूप से धन लिया जा रहा है, जबकि आयुष्मान योजना के तहत इलाज निशुल्क होना चाहिए। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ कर्मचारियों पर गलत कामों में सहयोग करने का दबाव बनाया जाता है। शिकायत में डॉ. जितेंद्र और डॉ. अनिमेष के नाम का भी उल्लेख किया गया है। एमडी का पत्र सामने आने के बाद अब पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और स्वास्थ्य विभाग पर जांच का दबाव बढ़ गया है।