
बरेली। शहर का दवा कारोबार एक बड़े घोटाले में फंस गया है। आगरा में पकड़े गए नकली दवा गैंग के तार अब बरेली से भी जुड़ चुके हैं। औषधि विभाग की टीम ने शुक्रवार को शास्त्री मार्केट और गली नवाबान स्थित तीन मेडिकल स्टोरों पर छापामारी कर पूरे स्टॉक की पड़ताल की। जांच में भले ही नकली दवाएं मौके पर बरामद नहीं हुईं, लेकिन यह राज खुल गया कि इन दुकानदारों ने आगरा से नकली दवाएं मंगाई थीं और कुछ का स्टॉक बेच भी डाला।
औषधि विभाग के सहायक आयुक्त संदीप कुमार के नेतृत्व में टीम ने वैष्णों इंटरप्राइजेज, (गली नवाबान के मेडिकल स्टोर) और शिवा मेडिको (शास्त्री मार्केट) पर शुक्रवार दोपहर से देर शाम तक छानबीन की। औषधि निरीक्षक राजेश कुमार और अनामिका अंकुर जैन ने घंटों तक दस्तावेज खंगाले। संचालकों ने कबूल किया कि उन्होंने ऑनलाइन भुगतान कर नकली दवाएं खरीदी थीं और स्टॉक के नकली होने पर उसे लौटाया भी, लेकिन तब तक कुछ बिक्री हो चुकी थी।
आगरा में औषधि विभाग व एसटीएफ की टीम ने हिमाचल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी से आने वाली नकली दवाओं का बड़ा जाल पकड़ा था। जांच के दौरान बरेली की तीन फर्मों के नाम सामने आए। आगरा से जो चार दवाएं नकली पाई गईं, उनके बिल बरेली की दुकानों से जुड़े थे। इनमें शामिल हैं:
जोमेटिन टैबलेट (मधुमेह रोग की दवा)
यूडिलिप-300 टैबलेट (लिवर संबंधी रोग)
रोजूवास्टेटिन (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा)
एलेग्रा टैबलेट (एलर्जी और एंटी हिस्टामिन)
ये दवाएं बरेली की दुकानों पर बरामद तो नहीं हुईं, लेकिन उनके क्रय-विक्रय की पुष्टि हो चुकी है।
औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि तीनों मेडिकल स्टोर संचालकों ने दवा खरीदने की बात मान ली है। उनसे विस्तृत खरीद-बिक्री का ब्यौरा मांगा गया है। विभाग अब नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई करेगा।
नकली दवाओं का यह खेल मरीजों की जान से सीधा खिलवाड़ है। अगर समय रहते यह नेटवर्क न पकड़ा जाता, तो बरेली में हजारों लोगों को जिंदगीभर के लिए दुष्प्रभाव झेलने पड़ते। विशेषज्ञ मानते हैं कि मेडिकल कारोबारियों का लालच ही इस खतरनाक खेल की जड़ है।
Published on:
30 Aug 2025 10:04 am
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