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पुलिस और अफसरों की नजरों में वह था अरबों का मालिक, रेड पड़ी तो पता चला कंगाल है शराब कारोबारी

सहारनपुर स्थित टपरी डिस्टिलरी में सौ करोड़ की टैक्स चोरी के मामले के बाद ईडी से लेकर पुलिस, एसटीएफ और एसआईटी के सभी अफसर यही मानकर चल रहे थे कि अजय जायसवाल अरबाें का मालिक है। जब रेड डाली गई तो पता चला कि वह तो कंगाल है। गिरफ्तारी के दौरान उसकी जेब में महज 400 रुपये और पैरों में फटे हुए जूते थे।

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बरेली

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lokesh verma

Feb 02, 2022

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सहारनपुर स्थित टपरी डिस्टिलरी में सौ करोड़ की टैक्स चोरी के मामले के बाद ईडी से लेकर पुलिस, एसटीएफ और एसआईटी के सभी अफसर यही मानकर चल रहे थे कि अजय जायसवाल अरबाें का मालिक है। जब रेड डाली गई तो पता चला कि वह तो कंगाल है। छापेमारी के दौरान हुई पूछताछ में उसने बताया कि उसे खुद ही नहीं पता कि बरेली, उन्नाव और कानपुर समेत कई शहरों में उसके नाम पर शराब के कई गोदाम और दुकान हैं। अजय जायसवाल का कहना है कि 2017 में मनोज ने उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो मांगे थे। हो सकता हैै कि इन दस्तावेज के जरिये उसके नाम शराब गोदाम और दुकान के लाइसेंस लिए गए हों, किन्तु उसे कोई जानकारी नहीं दी गई। इस तरह अजय के नाम पर मनोज जायसवाल करोड़ों रुपये कमाता रहा। वहीं, अजय जायसवाल कंगाली में जीवन बिताता रहा। गिरफ्तारी के दौरान उसकी जेब में महज 400 रुपये और पैरों में फटे हुए जूते थे।

अजय जायसवाल का कहना है कि वह मूलरूप से भमोरा के गांव बल्लिया का निवासी है। गांव में करीब सात बीघा पुश्तैनी जमीन और सुनार की छोटी सी दुकान थी। दुकान से खर्चा पानी भी नहीं निकलने के चलते वह 2004 में ही गांव छोड़कर आ गया था। इसके बाद उसने बन्नूवाल कॉलोनी 30 गज का छोटा सा घर बनाया और यहीं की रहने वाली रीता से विवाह कर लिया। इसी घर में उसने नीचे परचून की दुकान खोल ली और ऊपर परिवार के साथ रहने लगा। उसका एक बेटा और दो बेटियां हैं। अजय ने बताया कि 2016 में आर्थिक तंगी के कारण पत्नी से विवाद के वह अलग हो गए। उसने बताया कि मनोज जायसवाल से रिश्तेदारी है। जब घर में खाने को रोटी नहीं थी तो वह मनोज के पास काम मांगने गया। मनोज ने 15 हजार रुपये महीना में नौकरी देते हुए उसे आंवला की एक अंग्रेजी और चार देसी शराब की दुकानों की देखरेख की जिम्मेदारी दे दी।

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अरबपति समझकर ईडी ने मारा था छापा

अजय शराब दुकानों की देखरेख करने लगा तो सभी को लगा कि वही इनका मालिक है। इसी वजह से ईडी ने छह माह पहले अजय के घर छापा मार दिया, लेकिन कुछ बरामद नहीं हो सका। जबकि अजय के नाम पर शराब का कारोबार करने वाले मनोज जायसवाल को कोई जानता तक नहीं था। उसके पास घर के खर्चे के लिए भी पैसे नहीं थे। जबकि बरेली में हरुनगला के नजदीक उसके नाम से शराब का गोदाम था, जिसके लाइसेंस की फीस भी 20 लाख रुपये थी। गोदाम से लाखों रुपये प्रति माह की आमदनी होती थी। उन्नाव और कानपुर में भी उसके नाम पर शराब के गोदाम थे। जिसका हिसाब किताब मनोज रखता था।

नाम उजागर होते ही छिपा दिया था अजय को

बता दें कि जब एसआईटी की छापेमारी में अजय का नाम उजागर हुआ तो मनोज जायसवाल ने उसे छिपा दिया था। मनोज ने कर्मचारी नगर के पास साईं धर्म कांटे के पास पांच हजार रुपये महीने किराए के मकान में रखवा दिया था।

बेटी से बात करते समय फूट-फूट कर रोया अजय

अजय जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने उसकी पत्नी रीता को फोन किया तो उससे बात करने से भी इनकार कर दिया। रीता ने कहा कि उसने चार साल से हमारी सुध तक नहीं ली, उससे बात क्यों करूं। अगर वह चाहता है तो अपनी बेटी से बात कर सकता है। इसके बाद अजय ने बड़ी बेटी से बात की। बेटी से बात करते-करते वह फूट-फूट कर रोने लगा और अपनी गलती भी स्वीकार की।

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इसलिए हुआ था पत्नी से विवाद

अजय ने बताया कि उसकी पत्नी मकान को अपने नाम पर करवाना चाहती थी। उसे लगता था कि वह उसके मकान को किसी दूसरे के नाम कर सकती है। इसी विवाद के कारण वे अलग हुए थे। इसके साथ ही मकान की दीवार पर विवादित मकान लिख दिया था, ताकि कोई भी उसे न खरीदे।


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