श्रावण मास के
सोमवारों में शिव जी के व्रतों एवं पूजा का विशेष विधान एवं महत्व है। शिव
जी के यह व्रत शुभ फलदायी होते हैं। इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक
समय ही भोजन किया जाता है। इस व्रत एवं पूजन में शिव एवं माता पार्वती का
ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुये पूजन करना चाहिए। सावन के
प्रत्येक सोमवार को श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा
करने का विधान है। शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद,
पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवि, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्ब पत्र,
दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप,
दीप, दक्षिणा सहित पूजा करने का विधान है। साथ ही कपूर से आरती करके भजन
कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए। पूजन के पश्चात् रूद्राभिषेक कराना
चाहिए। ऐसा करने से भोले भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनायें
पूर्ण करते हैं। सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित
फल की प्राप्ति होती है।