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शादी कर बच्चे पैदा करें मोहन भागवत, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सनसनीखेज बयान, पीएम मोदी पर भी ये कही बात

बरेली में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर सवाल उठाए और सनसनीखेज बयान दे दिया।

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बरेली

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Anuj Singh

Apr 05, 2026

swami avimukteshwaranand shankaracharya

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य

Shankaracharya Avimukteshwaranand Big Statement on Mohan Bhagwat: यूपी के बरेली में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। देवभूमि इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में हुई इस बैठक में उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भारत की विदेश नीति, इजरायल-ईरान युद्ध और गौ रक्षा जैसे विषयों पर खुलकर बात की।

मोहन भागवत पर सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं। उन्होंने पूछा कि भागवत जी खुद क्यों नहीं शादी करते और बच्चे पैदा नहीं करते? दूसरों को सलाह देने से पहले उन्हें खुद यह काम करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि सलाह देने वालों को पहले खुद उदाहरण पेश करना चाहिए।

गौ माता की रक्षा पर समर्थन

अविमुक्तेश्वरानंद ने सत्ता पक्ष से अपील की कि अगर वे गौ माता की रक्षा के लिए कानून बनाते हैं, तो हम उनके साथ खड़े हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं न सत्ता पक्ष का हूं और न विपक्ष का। जो भी हमारी बात सुनेगा और गौ रक्षा के लिए काम करेगा, हम उसके साथ खड़े होंगे। पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर राष्ट्र और धर्म के हित में फैसला करना चाहिए।

भारत की गुट निरपेक्ष नीति

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत शुरू से ही गुट निरपेक्ष देश रहा है। भारत ने कभी किसी युद्ध में किसी पक्ष का साथ नहीं दिया। लेकिन इस समय प्रधानमंत्री के मौन के कारण लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि भारत शायद इजरायल के पक्ष में खड़ा हो गया है। उन्होंने पूछा कि यहूदियों के साथ हमारा ऐसा कौन सा गहरा संबंध है कि हम उनके इतने करीब जा रहे हैं?

युद्ध में न्याय और अन्याय

अविमुक्तेश्वरानंद ने इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर युद्ध में दो पक्ष होते हैं, एक न्याय का और दूसरा अन्याय का। आज एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान। लेकिन पूरी दुनिया के विद्वान इस मुद्दे पर चुप हैं। यह मानवता के खिलाफ अपराध है। उन्होंने विश्व के सभी विद्वानों से अपील की कि वे सामने आएं और साफ-साफ बताएं कि कौन न्याय के रास्ते पर है और कौन अन्याय पर। विद्वानों का काम है कि जनता को सही और गलत के बारे में जागरूक करें। लेकिन आज वे चुप हैं, जो ठीक नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी पुरानी नीति पर टिके रहना चाहिए। प्रधानमंत्री के मौन से लोगों में भ्रम फैल रहा है। उन्हें इस पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए।

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