
बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड को समाप्त कर एक ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड को बनाने के फैसले का बरेली के मुसलमानों ने विरोध किया है। दरगाह आला हजरत से जुड़ी संस्था जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा है कि सरकार को दोनों वक्फ बोर्ड को मिलाना नहीं चाहिए। ये दोनों बोर्ड कानूनी हैसियत रखते हैं। इनको तत्काल प्रभाव से भंग कर नए सिरे से दोनों बोर्ड का गठन किया जाए।
सही लोग हों बोर्ड में शामिल
मौलाना शहाबुद्दीन ने मांग की है कि बोर्ड की कार्यकारणी में ऐसे लोगों को जगह दी जाए जो मुस्लिम समाज के हितैषी हों और उनके दिलों में कौम और मिल्लत की सेवा करने का जज्बा हो।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देखा गया है कि जो भी वक्फ बोर्ड में आया उसने बुजुर्गों की संपत्तियों को खुर्द बुर्द किया और करोड़ों की जमीनों को कौड़ियों के भाव में बेच दिया। किसी ने भी मुसलमानों की तरक्की की तरफ ध्यान नहीं दिया।
दूसरे प्रदेशों की तरह आदर्श हो वक्फ बोर्ड
मौलाना शहाबुद्दीन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि नए सिरे से बनने वाले वक्फ बोर्ड को पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तरह आदर्श बनाना चाहिए वहां पर वक्फ बोर्ड के माध्यम से मस्जिद के इमामों को पगार दी जाती है, यतीमों और बेवाओं की आर्थिक मदद की जाती है, जगह जगह पर पब्लिक स्कूल और मदरसे खोले गए हैं जहां बेहतरीन तालीम दी जाती है साथ ही कौम के होनहार बच्चों का भविष्य संवारा जाता है।
क्या कहा था मंत्री ने
प्रदेश सरकार में वक्फ राज्य मंत्री मोहसीन रज़ा का बयान आया था कि सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड को समाप्त कर अब एक ही मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाने पर सरकार विचार कर रही है।उन्होंने कहा था कि उनके पास काफी सुझाव आए थे जिसके बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया है और विभिन्न विभागों से राय ली जा रही है।
Published on:
25 Oct 2017 08:23 am
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