
42 years after Congress gave tickets to Rajput
बाड़मेर. पश्चिमी राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने 42 साल बाद राजपूत प्रत्याशी को उतारा है। 1952 से 2019 तक हुए चुनावों में दो बार कांग्रेस ने राजपूत प्रत्याशी को टिकट दिया और दोनों ही बार हार हुई। 1977 में मिली शिकस्त के बाद कांग्रेस ने यहां जाट-मुसलमान और अनुसूचित जाति के फैक्टर पर ही भरोसा किया लेकिन इस बार जाट प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया है।
1952 से अब तक हुए चुनावों में कांंग्रेस के लिए बाड़मेर-जैसलमेर में जाट- मुसलमान और अनुसूचित जाति का गठजोड़ फायदेमंद रहा। इसी का नतीजा रहा कि कांग्रेस 1991, 1996, 1998,1999 में लगातार जीती। वर्ष 2004 के चुनावों में भाजपा ने मानवेन्द्रसिंह को टिकट दिया तो मानवेन्द्र ने कांगे्रस के जातिगत गठजोड़ में सेंध मारी और मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में किया।
मानवेंद्र की 2 लाख 71 हजार 888 वोटों से रेकार्ड जीत हुई। 2009 के चुनावों में कांग्रेस ने हरीश चौधरी को टिकट दिया। हरीश ने कांग्रेस के इस गठजोड़ को काफी हद तक फिर साध लिया और मानवेन्द्र को शिकस्त खानी पड़ी।
यहां बदला समीकरण
2014 के चुनावों में समीकरण एकदम ही बदल गए। कांग्रेस ने हरीश चौधरी को टिकट दिया तो भाजपा ने भी कर्नल सोनाराम चौधरी को मैदान में उतार दिया। इस दौरान भाजपा से नाराज जसवंतसिंह निर्दलीय उतर गए। एेसे में वोटों के बंटवारे में कर्नल सोनाराम चौधरी ने जीत दर्ज की।
अब नया समीकरण
कांग्रेस जाट मतदाताओं को अपने साथ जोड़े हुए रही लेकिन कर्नल सोनाराम चौधरी के भाजपा में जाने के साथ ही जाट मतदाताओं का झुकाव कर्नल सोनाराम के साथ रहा। इस बार के चुनावों में नया समीकरण आ गया है। कांग्रेस ने मानवेन्द्रसिंह को टिकट देकर राजपूत मतदाताओं पर दांव खेला है।
42 साल बाद भरोसा
कांग्रेस ने 1962 के चुनावों में रामराज्य परिषद के तनसिंह के सामने ओंकारसिंह को टिकट दिया था जो हार गए। इसके बाद 1977 में तनसिंह ने खेतसिंह को हरा दिया। 1977 के बाद कांगे्रस ने राजपूत प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है।
Updated on:
30 Mar 2019 01:43 pm
Published on:
30 Mar 2019 01:43 pm
