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Drug Smuggling: पाकिस्तान से बाड़मेर आई ड्रग, हेरोइन से भी महंगी, गुजरात सप्लाई से पहले पकड़ी गई, कीमत 25 करोड़

Barmer Drug Smuggling: भारत-पाक सीमा पर डंप की गई 5 किलो मेटाफेटामाइन ड्रग्स को गुजरात ले जाते समय दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। एटीएस जांच में सामने आया कि तस्करी का यह नेटवर्क व्हाट्सऐप के जरिए संचालित हो रहा था।

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। फोटो- पत्रिका

बाड़मेर। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी का सिलसिला लगातार जारी है। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर ड्रग्स की खेप भारत में पहुंचा रहे हैं। ताजा मामले में पाकिस्तानी तस्कर ने सीमा पर बीएसएफ की बीओपी के बीच 5 किलोग्राम मेटाफेटामाइन ड्रग्स डंप करवाई, जिसे स्थानीय तस्करों ने उठाकर गुजरात सप्लाई के लिए रवाना कर दिया। हालांकि, गुजरात एटीएस से मिले सटीक इनपुट के आधार पर राजस्थान एटीएस और सदर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दोनों तस्करों को रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया।

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बाड़मेर एसपी चूनाराम जाट ने बताया कि गुजरात एटीएस की सूचना पर राजस्थान एटीएस टीम और सदर थाना पुलिस ने बाड़मेर-अहमदाबाद हाईवे पर लोरटी हाइट के पास नाकाबंदी की। इस दौरान संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें 5 किलोग्राम मेटाफेटामाइन बरामद हुई। पुलिस ने सलमान खान पुत्र लालाखां और शंकराराम पुत्र रमेशराम निवासी सज्जन का पार (रामसर) को मौके से गिरफ्तार कर लिया। बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत 25 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह ड्रग्स हेरोइन से भी महंगा बताया जा रहा है।

पाक तस्कर से सीधे संपर्क में था आरोपी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सलमान खान पाकिस्तान के तस्कर के सीधे संपर्क में था। दोनों के बीच व्हाट्सऐप के माध्यम से लगातार चैटिंग, कॉल और वीडियो कॉल होती थी। तस्कर मसात ने 1 अप्रेल को भारत-पाक सीमा पर तालब का पार और बन्ने की बस्ती पोस्ट के बीच ड्रग्स की खेप डंप करवाई। इसके बाद सलमान ने सीमा क्षेत्र में पहुंचकर ड्रग्स उठाई और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर पाक तस्कर को भेजी, ताकि डिलीवरी की पुष्टि हो सके। इसके बाद दोनों आरोपी खेप लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गए, जहां इसे एक अन्य तस्कर मुन्ना भाई को सौंपना था।

लोकेशन शेयर कर करवाई डिलीवरी

एटीएस अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तानी तस्कर ने व्हाट्सऐप के जरिए ड्रॉप लोकेशन शेयर की थी। उसी लोकेशन के आधार पर भारतीय तस्कर मौके पर पहुंचे और खेप उठाई। इससे साफ है कि तस्करी का यह नेटवर्क तकनीक का इस्तेमाल कर बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, जिसमें सीमा पार के तस्करों से लेकर स्थानीय स्तर पर सहयोग करने वालों तक की भूमिका खंगाली जा रही है।

पहले भी तस्करी में शामिल होने की आशंका

पुलिस जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि आरोपी पहले भी इस तरह की तस्करी में शामिल रहे हैं। सीमा से ड्रग्स उठाकर गुजरात और अन्य राज्यों तक पहुंचाने के बदले उन्हें मोटी रकम मिलती थी। आरोपियों के बैंक खातों में दिल्ली और गुजरात से संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। पुलिस इन लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।

मोबाइल से मिले अहम डिजिटल सबूत

एटीएस एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। उनकी प्रारंभिक जांच में पाकिस्तानी तस्कर से चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और लोकेशन शेयरिंग के पुख्ता सबूत मिले हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

एटीएस के एसपी मौके पर पहुंचे

ड्रग्स तस्करी मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थान एटीएस के एसपी ज्ञानचंद यादव और बाड़मेर एसपी चूनाराम जाट मंगलवार सुबह स्वयं बॉर्डर क्षेत्र में पहुंचे और मौके की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने सीमावर्ती गांवों में दबिश देकर कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की। मामले में रासुका के आरोपी रोशन खलीफा को भी रामसर थाने लाया गया, जहां उससे लंबी पूछताछ की गई। इसके अलावा अन्य कई संदिग्धों से भी अलग-अलग पहलुओं पर पूछताछ जारी है। एटीएस एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया कि कई लोगों से पूछताछ की गई है और उनकी भूमिका को लेकर जांच जारी है।

एडीजी की आमजन से सहयोग की अपील

इस मामले के बाद एडीजी एटीएस दिनेश एमएन ने कहा कि सीमा पार से ड्रग्स, हथियार और विस्फोटक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी को भी ऐसी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो तुरंत एटीएस को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।