
Account book exist in the digital era
दिवाली पर होती है बही की खरीद : मूल्य में एक व पांच का आंकड़ा महत्वपूर्ण, वार्षिक लेखा का माध्यम बही
डिजिटल युग में भी अपना वजूद रखती है खाता बही
पुष्य नक्षत्र में खरीदारी मानी जाती है उत्तम
डिजिटल युग में जहां कम्प्यूटर व लैपटॉप सभी की जरूरत बन गए हैं वहींव्यापारी लेनदेन का हिसाब बही खाते में लिखने की परम्परा को अब भी निभा रहे हैं। खासकर धनतेरस पर इसकी खरीददारी करते हैं।
बही में वर्ष का ब्यौरा रखते है और आवश्यकता होने पर बही देखकर ग्राहक को हिसाब किताब दिखाते हंै। इसके आधार पर पैसों का लेनदेन भी होता है।
दीपावली पर विशेष महत्व : दीपावली से कुछ दिन पहले पुष्य नक्षत्र से बही खरीदने का दौर प्रारम्भ हो जाता है। इसके बाद धनतेरस व दीपावली पर शुभ मुहूर्त में बही का पूजन कर इसमें लिखना प्रारम्भ करते हैं।
बही में लिखते हैं विवरण : बही के पृष्ठ में 8 कॉलम होते है। जिसमें तिथि, विवरण, पृष्ठांक, जमा व नामे की राशि आदि के कॉलम बने होते हैं। जिसमें व्यापारी प्रतिदिन का हिसाब लिखते हैं। आवश्यकता होने पर इसे कभी भी आसानी से देख सकते हैं। वार्षिक लेखा-जोखा मिलाने मंे भी सहायक होती है।
मूल्य में भी एक व 5 का आंकड़ा
शहर के कुछ दुकानों पर मिलने वाली बही की रेट में एक व पांच का आंकड़ा विशेष महत्व का है। बही का मूल्य 315, 361, 405, 451, 541, 631, 721, 901, 1081, 1261 आदि हैं। ऐसे में बही खरीदने वाले व्यापारी इस क्रम में रकम देकर मनचाही बही खरीदते हैं।
आज ये रहेगा
शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर बही खरीद का शुभ मुहूर्त सुबह 6.51 से 8.15 तथा 9.38 से 11 बजे, दोपहर में 12 से 12.44 तथा 3 से शाम 6.27 का है। दीपावली के दिन बुधवार को सुबह 6.51 से 9.36, 11 से 12.21 शाम को 4.31 से 5.53 तथा रात्रि 7.35 से 9.11 बजे तक रहेगा।
परम्परा कायम
&व्यापारियों के हिसाब के लिए बहियां काफी महत्वपूर्ण है। दीपावली व धनतेरस पर इसे शुभ मुहूर्त में खरीदा जाता है। यह परम्परा के अनुसार शुभ है। कमल सिंहल, व्यापारी
Updated on:
05 Nov 2018 07:44 am
Published on:
05 Nov 2018 07:44 am
