8 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan New Rail Project : पचपदरा रिफाइनरी को रेल नेटवर्क से जोड़ने से पहले विवाद, जानें क्यों फंसा पेंच

Balotra-Pachpadra Rail Line: राजस्थान के ड्रीम प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की कवायद अब विवादों के जंक्शन पर आकर रुक गई है।

2 min read
Google source verification
Balotra-Pachpadra Rail Project

पचपदरा-बालोतरा के बीच में निकलने वाली पुरानी रेल लाइन मार्ग के आसपास मकान और बस्तियां बसने से अतिक्रमण बढ़ गया। फोटो: पत्रिका

बालोतरा। राजस्थान के ड्रीम प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की कवायद अब विवादों के जंक्शन पर आकर रुक गई है। पचपदरा रिफाइनरी तक रेल पहुंचाने के लिए प्रस्तावित नए रूट और पुराने ऐतिहासिक ट्रैक को लेकर छिड़ी जंग ने प्रशासन और सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है।

हाल ही में क्षेत्रीय विधायक डॉ. अरुण चौधरी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को तिलवाड़ा से नई पटरी बिछाकर पचपदरा तक रेल चलाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, दूसरी ओर पचपदरा, मंडापुरा, सांभरा सहित प्रभावित गांवों के ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस नए विकल्प के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

पुराना रूट बनाम नया प्रस्ताव

विवाद की मुख्य जड़ वह पुरानी रेल लाइन है जो रियासत काल में बालोतरा से सीधे पचपदरा तक जुड़ी थी। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे के पास पहले से ही आरक्षित जमीन मौजूद है, लेकिन उस पर अब अवैध निर्माण और कब्जे हो चुके हैं। प्रशासन इन कब्जों को हटाने के बजाय तिलवाड़ा से नया रूट तैयार करने की योजना बना रहा है।

भू-माफियाओं को संरक्षण का आरोप

बालोतरा और पचपदरा के बीच पुरानी रेल लाइन के आसपास अब सघन बस्तियां बसने से अतिक्रमण की समस्या विकराल हो गई है। स्थानीय नीरज सिसोदिया, जगदीश माली, पदम शर्मा, मनोज सोनी, गुमानसिंह, पदम विश्नोई व आशुदान चारण सहित ग्रामीणों का दावा है कि पुरानी लाइन को छोड़कर नया प्रस्ताव रखना सीधे तौर पर उन अतिक्रमियों और भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाना है जिन्होंने रेलवे की बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर रखा है।

ग्रामीणों ने बताया कि नया रूट अपनाने से सरकार को जमीन अधिग्रहण के लिए मोटा मुआवजा देना होगा, जो सरकारी धन की बर्बादी है। वर्तमान में तिलवाड़ा से प्रस्तावित नई रेल लाइन बिछाने के लिए ड्रोन सर्वे के जरिए मार्किंग का काम शुरू होने से नमक उत्पादकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में स्थानीय प्रभावित ग्रामीण इस नए रूट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

सर्वे से बढ़ी किसानों की चिंता

तिलवाडा से प्रस्तावित नई रेल लाइन के सर्वे के नाम पर सांभरा ग्राम के किसानों की उपजाऊ जमीन छीनना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। किसान हमेशा से देश के विकास के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अपनी जमीन का विनाश स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं रिफाइनरी की आड़ में सांभरा का नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-ज्ञानुदया चौधरी, एडवोकेट, सांभरा

नमक उद्योग पर संकट

तिलवाडा से प्रस्तावित नई रेलवे लाइन माग में खारवाल समाज की पारंपरिक नमक क्षेत्र की कीमती खानें आ रही हैं, ज इस परियोजना से नष्ट हो जाएंगी। यह सैकड़ों परिवारों क आजीविका पर प्रहार है। सरकार जनहित में इस विवादित नए रूट को छोड़कर पुरानी बालोतरा-पचपदरा लाइन की आरक्षित भूमि पर कार्य शुरू करे।
-पूजा राठौड़, प्रशासक, पचपदरा

रेलवे की संपत्ति की अनदेखी

बालोतरा से पचपदरा की पुरानी रेलवे लाइन को नजरअंदाज कर तिलवाड़ा से नई लाइन का प्रस्ताव देना सीधे तौर पर रेलवे की करोड़ों रुपए की संपत्ति को अतिक्रमियों के हवाले करने जैसा है। यह कदम भू-माफियाओं को संरक्षण देने की साजिश प्रतीत होता है। रेलवे को अपनी मूल जमीन पर ही ट्रैक बिछाना चाहिए।
-डालाराम प्रजापत, प्रशासक, मंडापुरा

बड़ी खबरें

View All

बाड़मेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग