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बाड़मेर नगर परिषद अपने ही खजाने पर लगा रही झाड़ू, चहेतों पर हो रही मेहरबान,जानिए पूरी खबर

- न किराया वसूल, ना ही गृहकर- ठेकेदारों पर भी मेहरबानी - अग्रिम राशि का हिसाब-किताब नहीं

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Barmer city council, broom, own treasure

Barmer city council broom putting its own treasure

बाड़मेर.बाड़मेर नगरपरिषद के अधिकारी व कार्मिक या तो सरकारी खजाने के प्रति गंभीर नहीं है या फिर चेहेतों को मलाई चटाने के लिए जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। नगरपरिषद के खाते तो यही कहानी बयां कर रहे हैं। गृहकर तो दूर रहा खुद की दुकानों के किराये की वसूली भी नहीं हो रही। इसी तरह होर्डिंग्स, रोड कटिंग की राशि के भी ठिकाने नहीं है। आय की नहीं और अग्रिम राशि के 27 लाख को गड़बड़ी से हजम कर लिया।

किराया दो लाख, बकाया 14 लाख
नगरपरिषद की शहर में 16 जगह दुकानें हैं, जिनसे प्रतिमाह दो लाख रुपए का किराया प्राप्त होता है। जानकर ताज्जुब होगा कि अभी 14 लाख 76 हजार रुपए का किराया बाकी है। सर्वाधिक किराया सेवा सदन के सामने स्थिति दुकानों से 3 लाख 54 हजार, पालिका बाजार के पीछे 2 लाख 71 हजार, सब्जी मंडी दुकानों से 2 लाख 55 हजार और सब्जी मंडी बावड़ी के पीछे स्थित परिषद् की दुकानों से 2 लाख 73 हजार रुपए लम्बे समय से बकाया है।

पेट्रोल पंपों पर मेहरबानी
ऑयल कम्पनियों की ओर से बफर स्ट्रीट में लगाने वाले साइन बोर्ड से पांच वर्षों के लिए एकमुश्त 50 हजार लेने का प्रावधान है। शहर में सात पेट्रोल पंप है, लेकिन नगरपरिषद् यह राशि वसूलने में भी अनाड़ी बनी हुई है। किसी से राशि नहीं ली गई। यही हाल बैनर व नगरीय कर का है।

ठेकेदारों पर मेहरबानी
ठेकेदारों की धरोहर राशि समय पर जमा नहीं होने पर जुर्माना राशि लगाने का प्रावधान है लेकिन उन्हें कथित फायदा देने के लिए यह जुर्माना भी नहीं लिया जा रहा। उदाहरण के लिए वर्ष 2015-16 में मृत पशुओं की हड्डी के ठेके की बोली लगाई गई। लेकिन 50 प्रतिशत राशि समय पर जमा नहीं करवाई गई और ना ही इसका ब्याज जमा करवाया। सरकारी विभागों की ओर से की गई रोड कटिंग पर जुर्माने का प्रावधान है या फिर उन्हें निर्धारित राशि जमा करवानी होती है। जलदाय विभाग की ओर से कई जगह परिषद सीमा में सड़कों की खुदाई की गई लेकिन उनसे निर्धारित राशि नहीं वसूली।

प्रशासन ने पूछा-कहां गए 27 लाख
अग्रिम राशि के पेटे 27 लाख रुपए की वसूली नहीं होने के मामले में जिला प्रशासन ने परिषद अधिकारियों से जवाब मांगा है। इस संबंध में समाचार प्रकाशन के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1975 से अग्रिम राशि का समायोजन नहीं हो रहा है। कई बार ऑडिट टीम ने आपत्तियां जताई। राजधानी से भी स्मरण पत्र आ गए लेकिन हिसाब-किताब नहीं मिलने से वसूली नहीं हो पा रही है।