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राजस्थान में यहां जातीय समीकरण बिगाड़ सकता है चुनाव परिणाम, प्रत्याशियों में छिड़ी जीत के लिए जंग

Barmer Jaisalmer Lok Sabha seat : यहां जाट और राजपूत प्रत्याशियों के बीच मुकाबला और भी रोचक हो गया है...
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Election

बाड़मेर।

देश के दूसरे सबसे बड़े लोकसभा ( lok sabha election 2019 ) निर्वाचन क्षेत्र बाड़मेर-जैसलमेर ( Barmer Jaisalmer Lok Sabha Constituency ) में सोमवार से चुनावी सरगर्मियां उस समय और तेज हो गईं जब कांग्रेस प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह और बीजेपी के कैलाश चौधरी ने लोकसभा चुनाव के लिए यहां से नामांकन दाखिल किया। इस दौरान दोनों ओर से सभा का आयोजन भी किया गया। जो सभा कम शक्ति प्रदर्शन ज्यादा नजर आईं। कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह ( manvendra singh ) का हौसला बढ़ाने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सभा में पहुंचे तो वहीं भाजपा के कैलाश चौधरी ( kailash choudhary ) के पक्ष में माहौल बनाने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी, सासंद सीआर चौधरी और पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ समेत प्रतापपुरी महाराज भी पहुंचे।

बाड़मेर-जैसलमेर सीट हमेशा से ही हॉट सीट रही है। इस सीट से जाट समुदाय और राजपूत समुदाय का काफी प्रभाव रहा है। ऐसे में दोनों ही पार्टियों ने इस सीट पर जातीय प्रभाव को देखते हुए दांव खेला है। इससे यहां जाट और राजपूत प्रत्याशियों के बीच मुकाबला और भी रोचक हो गया है। ऐसे में जातीय समीकरणों के खेल में इस सीट से चुनावों के परिणाम भी प्रभावित कर सकते हैं।

बायतु से विधायक रहे भाजपा के कैलाश चौधरी का यह पहला लोकसभा चुनाव है। पिछले विधानसभा चुनाव में कैलाश चौधरी बायतु से चुनाव हार गए थे। जबकि भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामने वाले मानवेन्द्र सिंह चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। मानवेन्द्र सिंह यहां से एक बार बीजेपी के सांसद रह चुके हैं और दो बार उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। पिछले विधानसभा चुनाव में मानवेंद्र सिंह झालरापाटन से मैदान में उतरे थे वसुंधरा राजे से चुनाव हार गए थे।


वसुंधरा राजे से चुनाव हारने के बाद से ही मानवेंद्र सिंह क्षेत्र में सक्रिय हो गए है, पिछले कई महीनों से मानवेंद्र लगातार ग्रामीणों संपर्क करने में जुटे हैं। जिसका उनको फायदा मिल सकता है। वहीं भाजपा के कैलाश चौधरी के पास इस बार आरएलपी का पूरा समर्थन रहेगा।