
कोर्ट और कलेक्टर ने जिस कब्जे को बताया था अवैध, बिना कागजों के कैसे बिक गई सरकारी संपत्ति (फोटो- पत्रिका)
Barmer land dispute: बाड़मेर शहर के हृदय स्थल सुभाष चौक स्थित करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर छह दशक से चल रहा अवैध कब्जे का खेल अब निर्माण तक पहुंच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों के दावे पहले नगर पालिका, जिला कलक्टर और न्यायालय तक खारिज कर चुके हैं, उन्हीं के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त कर ली गई।
वहीं, नगर परिषद से कुछ पट्टे और भवन निर्माण की स्वीकृति भी जारी हो गई। बिना स्वामित्व के दस्तावेज के न केवल सौदे हुए, बल्कि निर्माण भी तेजी से जारी है। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन अब भी सरकार के नाम दर्ज है।
इस मामले में नगर परिषद की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। पूर्व में सभी दावे खारिज हो चुके हैं, अवैध कब्जा हटाने के आदेश भी जारी हो चुके थे।
इसके बावजूद नगर परिषद ने भवन निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी और निर्माण कार्य जारी है। बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी ने भी इस गंभीर प्रकरण को लेकर स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
वर्ष 1976 में शंकरानंद के पुत्र रामेश्वर प्रसाद ने नगर पालिका बाड़मेर में भवन निर्माण स्वीकृति के लिए आवेदन किया। नगर पालिका ने उनसे जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रमाण नहीं दिया गया। दस्तावेज नहीं देने पर आवेदन निरस्त कर दिया गया।
इसके बाद 1986 में तत्कालीन जिला कलक्टर ने अपील संख्या 21/84 खारिज कर दी। वर्ष 2000 में जन अभाव अभियोग एवं सतर्कता समिति ने जांच के बाद अवैध कब्जा हटाने के आदेश दिए और 2001 में नगर पालिका ने 24 घंटे में कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया। इसके बाद 2004 में एडीजे कोर्ट ने भी दावा खारिज कर दिया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1960 में महेशानंद महाराज के निधन के बाद उनकी कुटिया की जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। महाराज अविवाहित थे, ऐसे में कोई वैध उत्तराधिकारी नहीं था। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जे के प्रयास शुरू कर दिए।
नगर पालिका और न्यायालय में मामला खारिज होने के करीब 21 साल बाद वर्ष 2025 में रामेश्वर प्रसाद, बाबूलाल सहित अन्य लोगों ने आपसी हक जताकर जमीन की खरीद-फरोख्त कर दी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उनके पास कोई वैध टाइटल या स्वामित्व अधिकार नहीं था, तो जमीन का सौदा किस आधार पर किया गया?
मामले को लेकर स्वायत्त शासन विभाग ने नगर परिषद से जांच रिपोर्ट तलब की। इसके बाद परिषद स्तर पर जांच तो की गई, लेकिन आरोप है कि रिपोर्ट में तथ्यों को नजरअंदाज कर 'गोलमाल' तरीके से प्रस्तुत किया गया।
इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त भगवत सिंह से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त को कल ही बोला है, इसकी सही जांच करवाएं।
-राजेंद्र सिंह चांदावत, नगर परिषद प्रशासक
Updated on:
06 Apr 2026 01:25 pm
Published on:
06 Apr 2026 01:25 pm
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