22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Patrika Impact: देरासर में प्यास से तड़पा पशुधन, प्रशासन ने सूखे कुंड में भरा पानी, गोवंश की बुझेगी प्यास

बाड़मेर: देरासर में भीषण पेयजल संकट के बीच प्यास से पशुओं की हालत बिगड़ गई। राजस्थान पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और राहत के लिए पानी के टैंकर भेजे गए।
4 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बाड़मेर

•

image

Nikhil Parmar

•

Updated: 19 May 2026, 4:02 PM IST

Water poured After Patrika Impact

गड्‌ढे में पानी पीता गोवंश फोटो: पत्रिका

बाड़मेर: रामसर क्षेत्र के देरासर में भीषण पेयजल संकट और प्यास से बेहाल पशुओं की स्थिति को लेकर प्रशासन आखिरकार हरकत में आ गया। राजस्थान पत्रिका के सोमवार के अंक में प्रकाशित खबर 'बूंद-बूंद की आस, हौदी में बुझी प्यास' के बाद जिला प्रशासन और जलदाय विभाग ने मौके पर राहत कार्य शुरू किए। खबर प्रकाशित होने के कुछ घंटों बाद ही विभाग की ओर से पशु खेलियों में पानी भरने के लिए दो टैंकर देरासर भेजे गए। इसके साथ ही लंबे समय से बाधित पेयजल आपूर्ति को सुचारू करने के प्रयास भी तेज कर दिए गए है।

जलदाय विभाग की टीम ने देरासर सहित आसपास के कई राजस्व गांवों और ढाणियों का दौरा कर खराब पड़े हेडपंपों की जांच की। जांच के दौरान 17 हेडपंप पूरी तरह सूखे मिले, जबकि कुछ हेडपंप चालू हालत में पाए गए। विभागीय अधिकारियों ने खराब और बंद पड़े जल स्रोतों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि ग्रामीणों और पशुओं को जल्द राहत मिल सके।

पशु खेलियों में डाला पानी

क्षेत्र में कई स्थानों पर पशु खेलियां नहीं होने के कारण टैंकरों से लाया गया पानी जमीन में गड्‌ढे खोदकर डाला गया, जिससे प्यासे पशु पानी पी सकें। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच पशुधन पर संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के अभाव में पशु इधर-उधर भटक रहे हैं और कई जगह उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

मृत गोवंश का होगा पोस्टमार्टम

देरासर में जलकुंड के पास मृत मिले गोवंश के मामले को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। पशुपालन विभाग की टीम मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराएगी, ताकि उनकी मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक तौर पर पानी की कमी को कारण माना जा रहा है, लेकिन विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में स्थायी जल प्रबंधन की व्यवस्था की जाए, क्योंकि हर वर्ष गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और पशुओं के लिए पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती है। मृत पशुओं को उठाने के लिए विभाग ने टेंडर निकाला था। लेकिन किसी ने टेंडर ही नहीं भरा। ऐसे में देरासर में मृत गोवंश को नहीं उठाया जा सका।

पानी के दो टैंकर भिजवा दिए

देरासर में पानी के दो टैंकर भिजवा दिए हैं। पशु चिकित्सा टीम को भेज कर करीब आधा दर्जन गायों का पोस्टमार्टम करवाया गया है। -रामलाल मीणा, एसडीएम रामसर

गांवों में 7 मई के बाद नहीं पहुंचा पानी

रेगिस्तान की तपती धरती पर इस बार गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही, बल्कि लोगों की प्यास भी बढ़ाती जा रही है। बाड़मेर जिले में पेयजल संकट अब भयावह रूप लेने लगा है। गांवों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई जगहों पर 7 मई के बाद से एक बूंद पानी की सप्लाई तक नहीं हुई। जीरो पॉइंट से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मटके और टंकियां खाली होने के बाद निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं, जबकि शहर में भी सप्ताह में एक दिन सप्लाई हो रही है।

विधायक से लेकर कांग्रेस नेताओं तक ने उठाई आवाज

भीषण गर्मी के बीच पानी की इस किल्लत ने आमजन की दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। महिलाएं सुबह से देर रात तक पानी के इंतजार में बैठी रहती हैं। कई मोहल्लों में लोग एक-दूसरे के यहां से पानी मांगने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और ज्यादा चिंताजनक है, जहां पशुधन तक पानी के संकट से जूझ रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब यह सामने आया कि गर्मी की शुरुआत में प्रशासन ने राहत के नाम पर केवल 15 टैंकरों की व्यवस्था की थी। जबकि जिलेभर में बढ़ती मांग के मुकाबले यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हुई।

बढ़ते जल संकट को लेकर बाडमेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी भाजपा पदाधिकारियों के साथ जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचीं और अधीक्षण अभियंता से मुलाकात कर हालात पर चिंता जताई। दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व पार्षद महावीर बोहरा सहित कई नेताओं ने जिला कलक्टर से मिलकर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिगड़ती स्थिति से अवगत करवाया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।

हाइड्रेट पॉइंट बढ़ाने की योजना

भीषण गर्मी और लंबी नहरबंदी के कारण बढ़ते संकट को देखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने मजबूत करने का निर्णय लिया है। आखिरकार पेयजल परिवहन व्यवस्था अधीक्षण अभियंता हजारीराम बालवा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में जिले में 40 अतिरिक्त टैंकर लगाने और प्रतिदिन 200 अतिरिक्त फेरों की बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल के निर्देश पर हुई बैठक में यह भी माना गया कि नहरबंदी पांच दिन और बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी गांव, ढाणी या शहरी क्षेत्र पेयजल से वंचित नहीं रहे। विभाग ने टैंकर संचालन तेज करने के लिए हाइडेंट पॉइंट्स बढ़ाने की भी योजना बनाई है, ताकि कम समय में ज्यादा फेरे लगाए जा सकें। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

कुछ सवाल जो मांग रहे जवाब ?

  • जब मई की शुरुआत से संकट गहराने लगा था तो समय रहते पर्याप्त टैंकर क्यों नहीं बढ़ाए गए?
  • सात दिन बाद पानी मिलने की नौबत क्यों आई?
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई पूरी तरह ठप होने के बावजूद निगरानी तंत्र क्या कर रहा था?
  • क्या हर साल गर्मियों में यही हालात दोहराए जाएंगे?