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पार्षद बन गया चपरासी, मूकदर्शक बने रहे जिम्मेदार!

- आरपीएसी की वरिष्ठ शिक्षक प्रतियोगी परीक्षा में पेपर वायरल का मामला - संदेह के घेरे में जिम्मेदार
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Case of Paper Viral in Senior Teacher Competitive Examination

Case of Paper Viral in Senior Teacher Competitive Examination

बाड़मेर. आरपीएससी की वरिष्ठ शिक्षक प्रतियोगी परीक्षा में पेपर वायरल होने में जिम्मेदारों की नाकामी उजागर हुई है। यहां एक निजी कॉलेज में प्रतियोगी परीक्षा के कुछ दिन पहले मिलीभगत कर एक पार्षद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बन गया और परीक्षा के दौरान विभिन्न कक्षों में घूमता रहा लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बनकर सब कुछ देखते रहे।

परीक्षा के पांचवें दिन एक नवंबर को सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने के बाद हरकत में आए जिम्मेदारों ने मामला दर्ज करवा आनन-फानन में जांच शुरू कर शनिवार को मामले का खुलासा किया। पुलिस ने इस मामले में शनिवार को केंद्राधीक्षक लक्ष्मीनारायण सोनी व माधव महाविद्यालय के व्यवस्थापक राणुमल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पार्षद नरेश देव गायब हो गया है।

यों हुआ था पेपर वायरल

पुलिस की जांच के अनुसार पार्षद नरेशदेव ने प्रतियोगी परीक्षा के कुछ दिन पहले माधव कॉलेज में मिलीभगत व फर्जीवाड़ा करते हुए खुद को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में संस्था के रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवाया। उसके बाद परीक्षा समय में केन्द्राधीक्षक लक्ष्मीनारायण की सहमति से व्यवस्थापक व पार्षद मिलकर कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर हिंदी का पेपर कॉलेज के शौचालय में ले गए। वहां कमोड की सीट पर रखकर मोबाइल से फोटो खींच कर सोशल मीडिया के जरिए अपने हितबंद को नकल करवाने के उद्देश्य से वायरल किया था।

कहां थी फ्लाइंग टीम
परीक्षा के दौरान जिला प्रशासन व पुलिस की ओर परीक्षा में अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए अलग-अलग फ्लाइंग दल भी गठित कर रखे थे। जो समय-समय पर परीक्षा केन्द्र पहुंच कर निगरानी कर रहे थे। लेकिन इस कॉलेज में पार्षद पर किसी अधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ी? इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

इयरफोन लगा घूमता रहा!
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सामने आया है कि पार्षद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनने के बाद केन्द्र में आराम से विभिन्न परीक्षा कक्षों में मोबाइल से जुड़ा इयरफोन लगाकर घूमता रहा और जिम्मेदार वीक्षक और अन्य कार्मिक देखते रहे और कइयों के गले भी मिलता रहा। जबकि परिसर में मोबाइल ले जाना वर्जित था।

क्यों हुए जिम्मेदार लापरवाह
जिले में पहले भी कई नकल प्रकरण उजागर हुए हैं। यहां नकल के मामले ज्यादा होने पर कई परीक्षाएं आयोजित करना भी बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी परीक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आए।

यह सवाल मांग रहे जबाव

- किस अधिकारी की मिलीभगत से पार्षद पहुंच गया कॉलेज?
- आखिर परीक्षा से जुड़े अधिकारियों को क्यों नहीं दिखी पार्षद की हरकतें?

- पेपर वायरल होने के बाद पार्षद के भागने से पहले क्यों नहीं हुई कोई पूछताछ?
- तमाम चाक-चौबंदी के बावजूद कैसे पेपर गया बाहर?

- आखिर वायरल पेपर का किसने उठाया फायदा?