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जोधपुर से बाड़मेर पहुंच रहा ‘जहर’, खेत बंजर, 50 हजार पेड़ सूखे, काले हिरणों पर संकट

जोजरी नदी में प्रतिदिन इंडस्ट्रीज से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे डोली, धवा और अराबा क्षेत्र प्रभावित हैं। कभी यहां करीब 3 हजार काले हिरण विचरण करते थे, अब इनकी संख्या घटकर मात्र 300 रह गई है।

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Pollution in Jojari River

प्रदूषित जोजरी नदी। फोटो- पत्रिका

जोधपुर की औद्योगिक इकाइयों से छोड़े जा रहे रासायनिक काले पानी ने बाड़मेर के कल्याणपुर क्षेत्र के डोली, धवा और अराबा गांवों में जनजीवन के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। खेतों में लगातार फैलते इस प्रदूषित पानी से जहां फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं काले हिरणों सहित अन्य वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट बन गया है।

ग्रामीणों के अनुसार पहले जहां खेत हरे-भरे रहते थे, अब वहां बंजर जमीन और सूखे पेड़ों का विस्तार हो चुका है। पेड़-पौधे मुरझा चुके हैं और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो गया है। खासतौर पर गांवों और खेतों में विचरण करने वाले काले हिरणों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

पशु-पक्षियों पर संकट

जोजरी नदी में प्रतिदिन इंडस्ट्रीज से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे डोली, धवा और अराबा क्षेत्र प्रभावित हैं। कभी यहां करीब 3 हजार काले हिरण विचरण करते थे, अब इनकी संख्या घटकर मात्र 300 रह गई है। इसके अलावा मोर, बतख और अन्य पक्षी व जानवर भी इस जहरीले प्रभाव से विलुप्ति की कगार पर हैं।

बंजर होती कृषि भूमि, सूखते पेड़

अब तक इस क्षेत्र में करीब पांच हजार खेत बंजर हो चुके हैं और 50 हजार से अधिक पेड़ सूख चुके हैं। प्रदूषित पानी का फैलाव इतना तेजी से बढ़ रहा है कि हर दिन दो से तीन नए खेत इसकी चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार फसलें नष्ट हो रही हैं और किसान अपने खेत छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

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ग्रामीणों ने जताई चिंता

ग्रामीण थानाराम ने बताया कि गांवों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। खासतौर पर बच्चों को खांसी, बुखार जैसी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण उम्मेदसिंह ने बताया कि अब तक इस गंभीर संकट को रोकने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस एक्शन प्लान नहीं तैयार किया गया है। ग्रामीणों ने समय रहते समाधान की मांग की है, ताकि पर्यावरण, वन्यजीव और मानव जीवन की रक्षा हो सके।