
Closed fountains in stadium park
बाड़मेर. गर्मी में सबसे अधिक सुकून की तलाश उद्यानों में की जाती है। पार्क में हरी-हरी दूब पर सुबह-शाम भ्रमण का एक अलग की आनंद है और फव्वारों की फुहारें गर्मी की परेशानी को कम कर देती हैं। बाड़मेर के पार्क में सुविधाएं सभी है। लेकिन ये अब किसी काम की नहीं हैं। नियमित पानी के अभाव में दूब जल चुकी है। वहीं फव्वारों की तो देखरेख शायद किसी को करनी ही नहीं है। बरसों से जैसे पड़े हैं, वैसे ही आज भी हैं। यहां भ्रमण को आने वाले लोग भी अब इन्हें नजरअंदाज करने लगे हैं।
स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद उद्यानों में सामान्य दिनों की बजाय बच्चों की धमा-चौकड़ी ज्यादा नजर आती है। लेकिन उनके मनोरंजन के लिए लगाए गए झूलों की स्थिति देखकर कोई भी अभिभावक उन्हें वहां जाने नहीं देता है कि कहीं चोट नहीं लग जाए। झूले अब कबाड़ की स्थिति में आ गए हैं। टूट-फूट होने के बाद किसी ने देखा तक नहीं है।
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महावीर पार्क: फव्वारे के पौंड में गंदे पानी का जमाव
कलक्ट्रेट के सामने का महावीर पार्क दुर्दशा का शिकार बना है। यहां फव्वारे लम्बे समय से बंद हैं। पौंड में अब गंदा पानी जमा हो गया है। यहां ठंडक के अहसास की जगह दुर्गंध फैली है। रखरखाव नियमित नहीं होने से बिजली के खुले पोल हादसे को न्योत रहे हैं। सबसे अधिक चिंता यहां बच्चों की रहती है। बरसात होने पर करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है। पार्क की देखरेख का जिम्मा नगर परिषद का है। पार्क के बाहरी क्षेत्र में रोड लाइटें काफी समय से बंद हैं। ऐसे में शाम होते ही लोग यहां से जाने शुरू हो जाते हैं। अंधेरा होने से आमजन भी परेशान हैं।
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आदर्श स्टेडियम पार्क: भूल गए कभी चलता था म्यूजिकल फव्वारा
पार्क में जहां कभी दूब होती थी, वहां अब धूल-मिट्टी है। लाखों रुपए खर्च कर लगाया गया म्यूजिकल फव्वारा अब भूतकाल की बात हो गई है। इसे पुन: ठीक कर चालू करने के बारे में अब शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं। फव्वारे के सिस्टम से कई पाट्र्स चोरी हो चुके हैं। झूलों की तो पूछो मत, बच्चे भी यहां चढऩे से पहले सोचते हैं कि कहीं गिर गए तो। बिजली के खुले तार यहां सुबह-शाम टहलने वालों के लिए खतरा बने हुए हैं। गर्मी में सुकून की तलाश में आने वालों को यहां पसीने छूटते हैं।
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कोई नहीं करता देखरेख
नगर परिषद के जिम्मे आने वालों पार्कों की देखरेख नहीं होने से उद्यान बदहाली पर आंसू बहाते नजर आते हैं। गर्मी के कारण लोग यहां आते हैं, लेकिन सुविधाओं की बजाय परेशानियां यहां ज्यादा दिखती है।
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ये बोले बच्चे
-पार्क में झूला झूलने आई हूं। लेकिन यहां पर तो झूले टूटे हुए हंै। एक भी झूला सही नहीं है। बच्चों के लिए यहां कुछ नहीं हैं।-अग्रिमा मोरवाल
-गर्मी में फव्वारों के पास खड़े होकर फुहारों का आनंद लेना अच्छा लगता है। लेकिन यहां आए तो फव्वारे तो बंद मिले।-कल्पना
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Published on:
15 May 2019 01:30 pm
