कई बच्चों को मिली नई जिंदगी- सरकार की इस महत्ती योजना से जिले में कई बच्चों को छोटी उम्र में ही बीमारी होने का पता चल गया जिसके बाद परिजनों ने रैफरल कार्ड के जरिए चिकित्सालय में जाकर बच्चों के ऑपरेशन करवाए। इस पर एेसे बच्चों के न केवल चेहरे खिले वरन नई जिंदगी भी मिल गई। निशक्तजन को चक्कर काटने से छुटकारा- निशक्तजन बच्चों के लिए यह योजना बडी काम की है। क्योंकि निशक्तजन प्रमाण पत्र के लिए चिकित्सा बोर्ड के चक्कर काटने होते हैं लेकिन स्कू ल में जांच टीम आने पर हाथोंहाथ निशक्तजन को प्रमाण पत्र मिल जाता है। वहीं, कम सुनने वाले बच्चों को ईयर मशीन, गूंगे-बहरे बच्चों को मशीन, ट्राइसाइकिल आदि भी मिल जाती थी। जिले में ३१०१, प्रदेश स्तर पर ७४३३० बच्चे- बाड़मेर जिले में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की तादाद ३१०१ है जबकि प्रदेश में ७४३३० विद्यार्थी है। इनको इस योजना से विशेष फायदा मिलता है क्योंकि स्कू ल में ही उनकी जांच हो जाती है। हालांकि इनकी जानकारी पूर्व में आवेदन करते वक्त भर ली जाती है जिस पर हर जनवरी में शिविर आयोजित होता है जहां इन बच्चों को ले जाकर उपकरण दिए जाते हैं।