
सरकारी तंत्र संदेह के घेरे में
बाड़मेर पत्रिका.
सरकारी कार्य किस धुरपट से चल रहे है इसका उदाहरण जिले में 35 के करीब जीएसएस बने हुए है। ग्राम पंचायत की जमीन डिस्कॉम को आवंटित ही नहीं हुई और यहां लाखों रुपए के जीएससए खड़े कर दिए गए है। इस तरह कोई अन्य निर्माण करता तो अतिक्रमण की श्रेणी में होता ेलेेकिन डिस्कॉम पर मेहरबानी इस कदर है कि यह मामला भी तब उठा है जब चार दीवारी निर्माण के लिए जमीन डिस्कॉम के नाम होना जरूरी हो गया है।
जिले के पैंतालीस गांवों के साथ महावीर नगर बाड़मेर के आसपास के लोग रह रहे हैं। इनमें चार दिवारी नहीं बनी हुई है। इसको लेकर जब पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला कि डिस्कॉम ने बिना जमीन परिवर्तित किए ही यहां जीएसएस बना दिए। जीएसस की स्वीकृति होने पर इनके निर्माण को लेकर दबाव बना। इधर कागजी कार्यवाही पूरी करने और जमीन आवंटन करने को लेकर प्रशासनिक अमला ढीलाई बरते हुए था। एेसे मंे डिस्कॉम व प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना भूमि डिस्कॉम के नाम किए ही यहां जीएससए निर्माण प्रारंभ कर दिया। जीएसएस बनने के बादभी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद मसला उठा कि चारदीवारी नहीं होने से यहां डिस्कॉम के आसपास रहने वालों को खतरा है। इस पर चारदीवारी के लिए फाइल चली तो जमीन डिस्कॉम के नाम होना जरूरी था। लिहाजा अब आवंटन को लेकर जल्दबाजी की जा रही है।
संदेह में सरकारी तंत्र- इस मामले को लेकर पूरा सरकारी तंत्र संदेह के घेरे में आ रहा है। एक तरफ नियमानुसार डिस्कॉम तब तक उसके नाम जमीन दर्ज नहीं होती, तब तक जीएसएस नहीं बना सकता। इसके बाद प्रशासन का भी दायित्व है कि वह सरकारी जमीन पर हो रहे किसी भी निर्माण को रोक कर पहले कागजी प्रक्रिया को पूरा करवाए, लेकिन यहां तो जीएसएस चालू होने तक प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
कुछ की मिली इजाजत- जीएसएस की चार दिवारी बनाने में भू परिर्वतन को लेकर दिक्कत आ रही है। हालांकि कुछ जगह जमीन परिवर्तन के बाद कार्य आरम्भ हुआ है। फिर भी करीब तीस-पैंतीस जगह यह समस्या है। प्रशासन ने भी कहा कि एेसी कोई दिक्कत आ रही है तो प्रशासन का सहयोग लेकर भूमि परिवर्तित करवाएं।- जगदीश सेठिया, कनिष्ठ अभियंता डिस्कॉम (सिविल विंग )
Published on:
03 Dec 2017 04:48 pm
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