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सूखे रेगिस्तान में अब निपजेंगे ड्राईफ्रुट

- किसान खुद होने लगे है आत्मनिर्भरता- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर
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- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर

- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर,- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर,- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर,- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर,- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीर

सूखे रेगिस्तान में अब निपजेंगे ड्राईफ्रुट
- किसान खुद होने लगे है आत्मनिर्भरता
- चौहटन के रेगिस्तान में लहलहा रही है अंजीरफोटो समेत
रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.
अकाल, अभाव और सूखाग्रस्त माने जाने वाले बाड़मेर जिले में अब सिंचित क्षेत्र में ड्राईफ्रुट (मेवे) निपजेंगे। यहां अनार और खजूर के बाद अब अंजीर की खेती किसानों को रास आ गई है। चौहटन व बालोतरा के इलाके में अंजीर की खेती कर इसके फल लेने की तैयारी में लगे किसान कहते है कि बादाम के पेड़ तो पहले ही लगा चुके है। सिंचित क्षेत्र और जमीन का उपजाऊपन यों ही साथ देता रहा तो आने वाले दिनों में रेगिस्तान कई किस्म की उपज लेगा।
बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में खेती को लेकर नित नए नवाचार ने अब किसानों की उम्मीदें इतनी बढ़ा दी है कि वे अकाल के दिनों केा भूलकर अब खुशहाल खेती के लिए आगे बढ़ रहे है। जिले में अब तक 17 अरब का जीरा, 100 करोड़ के अनार, करोड़ों की खूजर का रिकार्ड बन चुका है। इसके अलावा अन्य फसलें व सब्जियां भी बुवाई की गई है लेकिन अब किसानों ने अंजीर की खेती भी शुरू कर दी है। चौहटन के रूपसिंह राठौड़ के खेत में अंजीर की फसल लहलहाने लगी है। 16 बीघा जमीन पर की गई इस खेती को संभाल रहे उनके पुत्र शिवप्रतापङ्क्षसह चौहटन कहते है कि यह प्रयोग करने से पहले काफी मुश्किल थी लेकिन सोचा कि एक बार प्रयास कर लिया जाए। आठ माह पूर्व इसके लिए खेत को तैयार किया गया और अब आठ माह में पौधे सिर से ऊपर चले गए है। आने वाले तीन चार माह में फल लगेंगे। एक बार लगे फलों को पहले झाड़ा गया ताकि फसल अच्छी आए।
लू से बचाव किया
शिवप्रताप कहते है कि इसके लिए सबसे बड़ी मुश्किल लू के दिनों में आई तब पत्ते झडऩे लगे लेकिन इसके लिए दवाइयों का छिड़काव करने से स्थिति शीघ्र ही नियंत्रण में आ गई और अब ऐसी परेशानी नहीं है। वे कहते है कि पहले खजूर का प्रयोग इस इलाके में सफल रहा है। अनार तो बड़ी संख्या में हो रहे है तो अब अंजीर ने भी उम्मीदों को चौगुना कर दिया है।
इतने ही महंगे है केर सांगरी
चौहटन इलाके में मेवों से पहले केर सांगरी व कुम्मट ने लोगों को काफी संबल दिया हुआ है। केर-सांगरी औैर कुम्मट क्षेत्र के हर गांव में पनप रहे है। इनकी कीमत भी 100 रुपए किलोग्राम मौसम में और सूखाकर बेचने पर 1200 से 1500 रुपए किलोग्राम तक पहुंच जाती है। इसको यहां का सूखा मेवा कहा जाता है।
सरकार मदद करे
सरकार ने खजूर के पौधों में अनुदान देकर किसानों को प्रोत्साहित किया है। अब अंजीर और जितने भी प्रयोग हो रहे है वे किसान अपने स्तर पर कर रहे है। सरकार एक तो रेगिस्तान में फसल व अन्य उपज लेने वालों को प्रोत्साहित करें। सरकारी मदद से किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।- शिवप्रतापसिंह चौहटन
किसान खुद आधुनिक
किसानों ने अब खुद को आधुनिक किया है। सिंचित क्षेत्र बढऩे के बाद नवप्रयोग होने से किसानों को इसका लाभ मिलने लगा है। अंजीर के लिए मौसम और पानी दोनों उपलब्ध है। यह खेती बाड़मेर में बहुतायत में कर किसान आमदनी बढ़ा सकते है।-डा. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक