
बालोतरा. अग्रवाल कॉलोनी स्थित घर से पिता की अर्थी को कंधा देकर पुत्रधर्म निभाती बेटियां।
दलपत धतरवाल
बालोतरा. पुरुष प्रधान समाज में बेटियों को हमेशा बेटों से कम समझा गया है। सभ्य कहे जाने वाले इस समाज में आए दिन कही भ्रुण हत्या, तो कहीं दहेज के लिए बेटियों को मार दिया जाता है। लेकिन बेटियों ने हमेशा ये साबित किया है कि वो बेटों से किसी भी तरह कम नहीं हैं। बालोतरा शहर में चार बहिनों ने शुक्रवार को एक ऐसी मिसाल कायम की है। चार बहिनों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर अंत्येष्टि में शामिल होकर श्मसान पहुंचाया तथा चारों ने पिता की चिता को मुखाग्रि देकर बेटे का धर्म भी निभाया।
शहर के अग्रवाल कॉलोनी में रहने वाले जलदाय विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता प्रकाशमल झालानी के चार बेटियां है। चारों ही शादीशुदा है। जिनमें से एक सूरत, एक बाड़मेर, एक बालोतरा व एक नावां सिटी में रहती है। झालानी का गुरुवार को निधन हो गया था। जिनका शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान झालानी की पुत्री तारा अग्रवाल, सीमा पटवारी, सुमन लोहिया व कृष्णा अग्रवाल ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को कंधा देकर घर से उठाया और श्मशान पहुंच कर अपने पिता को मुखाग्रि दी। झालानी की ये चारों बेटियां शिक्षित है। तारा अग्रवाल ने बताया कि इनके भाई नहीं था। फिर भी पिता ने कभी इन्हें पुत्री नहीं बल्कि पुत्र के समान प्यार दुलार दिया, तो उन्होंने भी पुत्र का धर्म निभाया।
यह है परम्परा- गौरतलब है कि हिन्दू धर्म के अनुसार पिता की मौत के बाद पुत्र ही अंतिम संस्कार करता है। जिस किसी के बेटा नहीं होता, वह गोद पुत्र लेता है या फिर कोई पुरुष रिश्तेदार अंतिम संस्कार का फर्ज निभाता है। महिलाएं तो श्मशानघाट तक नहीं जाती है। एेसे में बेटियों के हाथों अंतिम संस्कार होना, एक अनुकरणीय उदाहरण है जो सामाजिक सोच में बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।
01- बालोतरा. अग्रवाल कॉलोनी स्थित घर से पिता की अर्थी को कंधा देकर पुत्रधर्म निभाती बेटियां।
Published on:
28 Apr 2018 06:10 pm
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