
औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान बना चुके बालोतरा की एक पहचान बालिका उच्च शिक्षा में पिछड़े शहर के रूप में भी है
बालोतरा.
औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान बना चुके बालोतरा की एक पहचान बालिका उच्च शिक्षा में पिछड़े शहर के रूप में भी है। शहर में बीस साल से बालिका महाविद्यालय क्रमोन्नति का इंतजार कर रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधि, प्रशासन आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थिति यह है कि गांवों में शिक्षा का बढ़ावा मिलने से हर साल सैकड़ों बालिकाएं यहां पढऩे आती है और स्नातक करते ही वापस घर चली जाती है। उनके सामने एक ही विकल्प है कि स्नातकोत्तर करना है तो बस घर बैठ कर पढ़ो। आसपास के कस्बों व गांवों में उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय भी कम तादाद में ही है।
शहर व क्षेत्र में बालिका शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है। बीते वर्षों में शहर व क्षेत्र में सरकार ने बालिका माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों को क्रमोन्नत नहीं किया तो नए विद्यालय भी नहीं खोले। शहर में एकमात्र बालिका उच्च माध्यमिक संचालित हो रहा है। यही स्थिति उपखंड सिवाना व तहसील मुख्यालय समदड़ी की है। करीब 35 हजार की आबादी वाले कस्बे सिवाना व 25 हजार की आबादी वाले कस्बे समदड़ी में एक-एक बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय है। इनके अलावा जसोल व मोकलसर में भी उमा विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में शिक्षकों व व्याख्याताओं की बड़ी पद रिक्तता पर अभिभावक सरकारी विद्यालयों की बजाए निजी विद्यालयों में छात्राओं को प्रवेश दिलाते हैं।
दर्जा पंचायत समिति का, विद्यालय नहीं- उपखंड बालोतरा के पाटोदी व कल्याणपुर में करीब तीन वर्ष पूर्व पंचायत समिति कार्यालय स्वीकृत किया था। इन समितियों से करीब दो दर्जन ग्राम पंचायत जुड़ी हुई हैं। पाटोदी व कल्याणपुर की आबादी दस हजार होने के साथ यहां बड़ा बाजार है, लेकिन यहां सरकारी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं है।
उच्च शिक्षा से वंचित बेटियां- चालू शैक्षणिक सत्र में बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बालोतरा में कक्षा 11 वीं, 12वीं में 215, समदड़ी में 170, सिवाना में 166, जसोल में 96, मोकलसर में 44 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। इसके अलावा राजकीय उच्च माध्यमिक व निजी विद्यालयों में हजारों छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन शहर में 20 वर्ष पूर्व प्रारंभ किए गए बालिका महाविद्यालय का विस्तार व क्रमोन्नत नहीं करने से हर वर्ष सीमित बालिकाओं को ही प्रवेश मिल पाता है।
महाविद्यालय को करें क्रमोन्नत-
जिला हर दृष्टि से पहले ही पिछड़ा है। अधिकांश अभिभावक पढ़ाईके दूर नहीं भेजना पसंद करते हैं। सरकार बालिका माध्यमिक विद्यालयों व कन्या महाविद्यालय को क्रमोन्नत करें। इससे अधिकाधिक को अवसर मिल सके।
भावना माली अध्यक्ष छात्रसंघ
बातें खूब, धरातल पर स्थिति अलग- दो दशक में शहर व क्षेत्र की आबादी बढ़ी है। बालिका शिक्षा को भी प्रोत्साहन मिला है। गांवों व शहर से हर साल सैकड़ों बालिकाएं पढऩे शहर आती है, लेकिन महाविद्यालय में प्रवेश नहीं मिलने निराश होती है।
के. ललीता
विद्यालय खोलें और क्रमोन्नत करें- सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं संचालित करने की बजाय पुराने विद्यालय क्रमोन्नत करें, नए खोलें। उपखंड मुख्यालयों पर कन्या महाविद्यालय खोलें। इससे उच्च शिक्षा हासिल कर बालिकाएं जीवन का सर्वांगीण विकास कर सके।
खुशबू सुन्देशा
Published on:
29 Nov 2017, 12:42 AM IST
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