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सिवाना गादीपति अभयराम महाराज का देवलोकगमन, शोक की लहर

- अंतिम दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, दी समाधि

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सिवाना कस्बे के सदर बाजार चौक में अंतिम दर्शन करते श्रद्धालु।

सिवाना कस्बे के सदर बाजार चौक में अंतिम दर्शन करते श्रद्धालु।

सिवाना. सिवाना गादीपति व मंछाराम महाराज के शिष्य अभयराम महाराज का गुरुवार को देवलोकगमन होने पर कस्बे सहित क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। पूरे दिन सम्पूर्ण सिवाना कस्बा बन्द रहा। चाय-सब्जी की दुकान से लेकर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान,दुकानें लोगों ने स्वेच्छा से बंद रखी। गुरुवार सवेरे से अभयराम महाराज के देवलोक गमन की खबर फैलते ही क्षेत्र व दूरदराज से श्रद्धालुओं का कस्बे के समाधि मन्दिर सदर बाजार चौक में आवागमन शुरू हो गया। दोपहर तीन बजे तक सदर बाजार चौक में श्रदालुओं की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। सदर चौक में अभयराम महाराज के पार्थिव देह को लगभग दो घण्टे तक अंतिम दर्शन के लिए विराजित किया गया। जहां अभयराम महाराज के शिष्य गोपालराम व नृत्यगोपालराम, भारत साधु समाज के प्रदेशाध्यक्ष महंत निर्मलदास, महंत परशुरामगिरी कनाना, राघवदास बालोतरा, नरसिंगदास समदड़ी, तुलसीदास पादरू, अचलाईनाथ मठ पिपलिया, पदमाराम, रामस्वरूपदास कालूड़ी, जगदीशदास, राममनोहरदास जोधपुर , चेतनगिरी मोकलसर सहित बड़ी संख्या में साधु-संतों ने पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साधु-संतों ने कहा कि अभयराम महाराज के देवलोकगमन से सिवांची व मालाणी के साधु-संत समाज को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी कभी पूर्ति नही हो सकती है। इस दौरान सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालुओं ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अभयराम महाराज के शिष्य गोपालराम व नृत्यगोपालराम सहित साधु-संत अभयराम महाराज के पार्थिव शरीर को गुरु समाधि मन्दिर परिसर में गए। जहां विधि-विधान से पार्थिव शरीर की पूजा-अर्चना की। समाधि स्थल पर भूमि पूजन कर अभयराम महाराज को समाधि दी।

दो दिन पहले हुए बीमार- अभयराम महाराज दो दिन पूर्व बीमार हुए थे। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर गए थे। वहां गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। दोपहर ढाई बजे उनकी पार्थिव देह सिवाना पहुंची। यहां लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में सिवाना विधाायक हमीरसिंह भायल भी शामिल हुए। गौरतलब है कि अभयराम महाराज के शिष्य सिवाना ही नहीं पूरे देश में हैं। एेसे में उनके निधन की सूचना पलक झपकते ही पूरे

क्षेत्र व देश के विभिन्न कोनों में बसे सिवाना के अप्रवासी परिवारों को मिल गई।

निप्र.

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