
Hurdle of rules in feed depot opened by state government
भीख भारती गोस्वामी
गडरारोड (बाड़मेर ). राज्य सरकार की ओर से खोले गए चारा डिपो में नियमों की अड़चन के चलते 10 फीसदी पशुपालकों को भी फायदा नहीं मिल रहा। वहीं 90 फीसदी पशुपालक इसके दायरे में नहीं आ रहे। ऐसे में कई गांवों में सरकारी चारा उपलब्ध होने के बावजूद बेसहारा व अन्य पशु दम तोड़ रहे हैं। बीते वर्ष जिलेभर में बारिश के अभाव में घास का तिनका भी नहीं हुआ, लेकिन सरकार ने लघु व सीमांत का का अड़ंगा डाल रखा है। इसके तहत 12 बीघा से अधिक जमीन वालों को राहत से वंचित रखा गया है।
10 फीसदी को ही लाभ
भीषण अकाल के कारण ग्रामीणों को महंगे चारे और पानी का प्रबंध करना भारी पड़ रहा है। आर्थिक कमजोर किसान अपने पशुओं को बेआसरा छोड़ रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद 15 अप्रेल को राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चारा डिपो खोलने की स्वीकृति दी।
इसमें 12 बीघा से कम जमीन वाले पशुपालकों को 560 से 700 रुपए प्रति क्विंटल चने का चारा उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे महज 10 प्रतिशत किसान ही इस दायरे में आ रहे हैं। शेष 90 प्रतिशत पशुधन के लिए चारे-पानी का प्रबंध पशुपालकों के लिए मुश्किल बना हुआ है।
तापमान के साथ बढ़ा पानी का भी संकट
गांवों में जलदाय विभाग की व्यवस्था फेल हो चुकी है। यहां बने अधिकतर जीएलआर में पानी नहीं पहुंच रहा। इन दिनों भीषण गर्मी के चलते पानी की मांग भी कई गुना बढ़ गई है। वहीं विभाग समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा। पशुपालकों की आंखों के सामने गोवंश प्रतिदिन दम तोड़ रह हैं।
संमध का पार निवासी धमालसिंह ने बताया कि उन्होंने जलदाय विभाग के अधिकारियों, तहसीलदार, विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से पानी की गुहार लगाई, लेकिन कहीं पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
प्रस्ताव भेजे है
43 पशु शिविर संचालित किए जा रहे है। 100 के प्रस्ताव भेजे गए है। इंतजाम बेहतर बनाने के लिए जहां स्वीकृत है वहीं चारा डिपो खुले इस पर सख्ती कर रहे है।
- हिमांशु गुप्ता, जिला कलक्टर
Updated on:
09 May 2019 11:35 am
Published on:
09 May 2019 11:35 am
