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50 लाख लोग आते है तो 2500 करोड़ भी आ सकते है

- रिफाइनरी के समानांतर ही विकसित हो सकता है पर्यटन- जैसलमेर में 7.5 लाख पर्यटक दे रहे है 1200 करोड़ का व्यवसाय - मैप के साथ आगे बढ़े सरकार तो मारवाड़ का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल बने मालाणी- जसोल-नाकोड़ा- आसोतरा- तिलवाड़ा - खेड़-बिठूजा-पचपदरा का बने धार्मिक मैप

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50 लाख लोग आते है तो 2500 करोड़ भी आ सकते है

50 लाख लोग आते है तो 2500 करोड़ भी आ सकते है

बालोतरा पत्रिका.

जैसलमेर में 7 लाख पर्यटक हर साल आते है और यहां का पर्यटन टर्न ओवर सालाना 1200 करोड़ का है। 200 करोड़ सम के धोरों से मिलता है। इसी नजरिए से सोचे तो अचंभित होंगे कि जसोल-नाकोड़ा- आसोतरा और क्षेत्र के पांच तीर्थ पर साल में करीब 50 लाख धार्मिक पर्यटक आ रहे है लेकिन यहां पर्यटन व्यवसाय को गति नहीं मिल रही। अब पचपदरा में 43 हजार करोड़ की रिफाइनरी का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है और आने वाले समय में जोधपुर से पचपदरा के बीच में पेट्रो केमिकल जोन 120 किमी की इस दूरी को भी पाट देगा। लिहाजा यहां धार्मिक पर्यटन के व्यवस्थित मैप की दरकार है। जैसलमेर के हिसाब से ही सोचें तो करीब 2500 करोड़ सालाना का पर्यटन व्यवसाय रिफाइनरी के साथ यहां खड़ा होने की उम्मीद की जा सकती है।

यह है यहां तीर्थों का संगम-

- मेवानगर- पाश्र्वनाथ मंदिर- 15 लाख

- आसोतरा- ब्रह्मा मंदिर-8 लाख

- जसोल- माता राणी भटियाणी मंदिर-25 लाख

- खेड़- रणछोडऱाय मंदिर-3 लाख

- बिठूजा- रामदेव मंदिर -3 लाख

- तिलवाड़ा-राव मल्लीनाथ एवं राणी रूपादे मंदिर- 1 लाख

- पचपदरा-भगवती आश्रम -1 लाख

क्या-क्या हो सकता है

- मिनी ट्रेन

बालोतरा से बीस किमी की दूरी में इन पांच तीर्थ के लिए स्पेशल मिनी ट्रेन का मैप बनाना यहां के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना बन सकता है। इसके लिए ट्रस्ट के साथ ही रेलवे की ओर से क्षेत्र को विशेष पैकेज देने की दरकार है।

- मार्केट

बालोतरा के चद्दर, पॉपलीन उत्पाद, पचपदरा के मिट्टी उद्योग, बालोतरा के जरी बूटा काम, बाड़मेर के हैण्डीक्राफ्ट, बुड़ीवाड़ा-जागसा के ऑर्गेनिक खेती उत्पाद सहित कई उत्पादों का मार्केट

- रेसिंग ट्रेक

सम और दुबई में रेसिंग ट्रेक धोरों पर है। मेवानगर, तिलवाड़ा और आसपास के इलाकों में नदी और धोरे दोनों है,यहां पर रेसिंग ट्रेक में घुड़सवारी, ऊंटदौड़ के साथ ही वाहनों की सफारी का आकर्षण बन सकता है।

- जसोल की गैर का रंग

जसोल और आसपास के इलाकों में गेर नृतक है जो देश-विदेश में धाक रखते है और निकट में लंगा कलाकार भी। इन कलाकारों के साथ यहां शिल्पग्राम बनाया जाए तो पर्यटकों को शाम के बाद दुबई की वैले डांस जैसी प्रसिद्धी यहां हो सकती है।