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बाड़मेर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-संयुक्त राज्य अमरीका के बीच संभावित युद्ध की खबरों ने खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। बाड़मेर जिले के सैकड़ों युवा रोजगार के लिए संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य खाड़ी देशों में हैं। लगातार आ रही धमाकों और सैन्य गतिविधियों की खबरों के बीच परिवारजन फोन और वीडियो कॉल के जरिए अपने प्रियजनों का कुशलक्षेम जान रहे हैं।
बाड़मेर शहर निवासी जगदीश सलून, जो दुबई के जबलअली क्षेत्र में कार्यरत हैं, बताते हैं कि वे जबल अली पोर्ट और दुबई इंडस्ट्रियल पार्क (डीआइपी) क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार इस इलाके में बाड़मेर के करीब 70-75 लोग कार्यरत हैं। वे कहते हैं कि दो दिन से रात के समय आसमान में धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दे रही हैं। चेतावनी जारी है, सतर्कता बढ़ी हुई है, लेकिन फिलहाल हम पूरी तरह सुरक्षित हैं। परिवार वाले चिंतित हैं, इसलिए लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
रॉय कॉलोनी निवासी रमेश जांगिड़ का कहना है कि बाड़मेर के कई लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। रात में धमाकों की खबरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जिससे घर पर चिंता बढ़ी है। हालांकि हमारे लोग सुरक्षित हैं और स्थानीय प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में युवा निर्माण, पोर्ट, औद्योगिक इकाइयों और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं। युद्ध की आशंका से परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हुई हैं, सुबह-शाम सबसे पहले मोबाइल पर कॉल और मैसेज की प्रतीक्षा रहती है।
ईरान-अमरीका युद्ध की खबरों से उपखंड क्षेत्र के गडरारोड, जैसिंधर, नाथानी, सुथारों पार, सरी का पार सहित कई गांवों के सैकड़ों परिजन चिंता में डूबे हैं। इन गांवों के दर्जनों युवा यूएई, दुबई और अन्य खाड़ी देशों में मजदूरी के लिए गए हैं। परिजन लगातार फोन और वीडियो कॉल कर अपने परिजनों का कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। जैसिंधर गांव के हितेश जांगिड़ और अशोक जांगिड़ ने बताया कि हमारे गांव के दो दर्जन से अधिक युवा दुबई में काम कर रहे हैं।
युद्ध की खबरों के बाद फोन पर बात की तो वे सभी सुरक्षित हैं। फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। इसी तरह गडरारोड क्षेत्र के अन्य गांवों से भी ऐसी ही जानकारी मिल रही है। परिजन युद्ध की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि हालात शीघ्र सामान्य होंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाड़ी देश मजदूरी का प्रमुख स्रोत है, लेकिन वैश्विक तनाव से परिवारों में बेचैनी बढ़ गई है।
सरदार पटेल मार्ग जोशियो की पोल के पास रहने बाली सुशीला खत्री 27 दिसम्बर को दुबई के बरसानाहर्डस से बाड़मेर आई है। वह दो माह से अपने बेटे संदीप खत्री और बहू पूजा के पास थी। पूजा की डिलीवरी होने पर वह वहां गई थी। बेटा और बहू दोनों दुबई में काम करते हैं। युद्ध की खबरों के बीच बेटे से बात करके हुई सुशीला भावुक हो गई। वह दिन में दिन में कई बार वीडियो कॉलिंग करती है। हालांकि उनके बेटे ने बताया कि वे वहां सुरक्षित है।
Published on:
02 Mar 2026 02:48 pm
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