5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

गांधी बनना आसान नहीं : थानवी

https://www.patrika.com/barmer-news/
2 min read
Google source verification
It is not easy to become Gandhi: Thanvi

It is not easy to become Gandhi: Thanvi

पद्मश्री मगराज जैन स्मृति सम्मान समारोह
गांधी बनना आसान नहीं : थानवी

बाड़मेर . पद्मश्री मगराज जैन स्मृति व्याख्यान एवं सम्मान समारोह रविवार को स्थानीय होटल कैलाश इंटरनेशनल के सभागार में वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान पर 29 जनों को पद्मश्री मगराज जैन स्मृति सम्मान प्रदान किया गया।
बतौर मुख्य वक्ता थानवी ने आज के भारत में गांधी की प्रासंगिकता विषयक व्याख्यान में कहा कि गांधी बनना आसान नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के बेरिस्टर मोहनदास जब भारत आए तो काठियावाड़ी गुजराती वेशभूषा में रहे। एक गरीब महिला को देखकर उनका हृदय द्रवित हुआ जिसके पास इतना भी कपड़ा नहीं था कि पूरा शरीर ढक सके। गांधी फिर इसी वेशभूषा में रहे। उन्होंने जिक्र किया कि इंग्लैंड के सम्राट से मिले तब भी उन्होंने यही कपड़ा पहना था।
उन्होंने कटाक्ष किया कि अंग्रेजों के नियम-कायदे आज भी भारत के प्रोटोकॉल में क्यों अपनाए जा रहे हैं, जब गांधी ने उस जमाने में ब्रिटेन में आम भारतीय की मिसाल कायम की। चार्ली चैपलिन का उदाहरण देते हुए बताया कि चार्ली गांधी से मिलने के लिए गए। चार्ली को लगा कि गांधी मशीनीकरण के विरोधी हैं, लेकिन मुलाकात में समझ में आ गया कि गांधी मशीनीकरण नहीं गैर जरूरी मशीनीकरण को स्वीकार नहीं करते।
थानवी ने स्पष्ट किया कि गांधी गाय को उपयोगी मानते थे। लेकिन गाय के लिए आदमी को खत्म किया जाए यह स्वीकार्य नहीं है। गांधी ने अक्षर ज्ञान को शिक्षा नहीं माना। ज्ञान और शिक्षा में भेद है। थानवी ने कहा कि बाजारवाद में नैतिकता का लोप हो रहा है। अफवाहों से आग लगने की नौबत बन जाती है। पूंंजीवाद के कारण समाज में गैर बराबरी आ गई है, ये सब बातें गांधी ने एक सदी पूर्व ही बता दी थीं जो आज भी प्रासंगिक हैं। गांधी बनना आसान नहीं है, भले ही कहा जाए कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी।
थानवी को मिला सम्मान : श्योर संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं राजस्थान पत्रिका के संपादकीय सलाहाकर ओम थानवी को राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए पद्मश्री मगराज जैन पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया। संस्थान के मदन सिंघल एवं सचिव नरेन्द्र जैन, संयुक्त सचिव लता कच्छवाह ने शॉल,श्रीफल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
29 जनों का सम्मान : समारोह में राजस्थान पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट ओम माली, नरपतसिंह काठी, अब्दुल कादिर सावा, गोविन्दसिंह बालेरा, जेठमल जैन, हरियादेवी डेडावास, मांगाराम माली मालियों की ढाणी, धीयादेवी बिढाणी, धाई देवी मिठड़ाउ, राणमल खत्री, ललित, अनवरखां बईया, उकाराम परिहार बालोतरा, महादेव माकड़, नवीनचन्द्र सिंहल, ओम जोशी, मुरली मनोहर दवे, इन्द्रसिंह रानीगांव, कैप्टन डॉ. आदर्श किशोर जाणी, पवन जोशी, सुरेश जाटोल, सांगाराम, नरसिंगाराम जीनगर, पारसमल मेहता, स्नेहलता, यज्ञदत्त जोशी, हनीफ खां रहुमा, कैप्टन डॉ. शंकरलाल को प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
पुस्तक का विमोचन : कार्यक्रम में साहित्यकार विनोद वि_ल की पुस्तक 'पृथ्वी पर दिखी पातीÓ का विमोचन वरिष्ठ पत्रकार थानवी ने किया। उन्हें ओरण हमारा जीवन, रेगिस्तान का लोक विज्ञान एवं रेगिस्तानी भीलों के गीत पुस्तकें भेंट की गई। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार अनवरखां एंड पार्टी ने राजस्थानी गीत से स्वागत किया। 16 वर्षीय हेमांग राखेचा ने थानवी को उनका स्कैच बनाकर भेंट किया।
ये रहे समारोह में मौजूद : अम्बालाल खत्री, पुरुषोत्तम खत्री, किशन वडेरा, वीरचन्द वडेरा, डॉ. एम.एल. डोसी, कमलसिंह महेचा, पीतम्बर खत्री, अनीता छगांणी, प्रदीप पगारिया, जयराम जोगू, सम्पतमल जैन, हरीसिंह लंगेरा, सागराम परिहार, कृष्णसिंह राणीगांव सहित कई जने मौजूद रहे।