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जीणे की बस्ती में जीने की जंग, प्यास की आस, वादों के संग

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Jeevan ki ji ki jeevan ki ji tha, thaas ki aas, with promises

Jeevan ki ji ki jeevan ki ji tha, thaas ki aas, with promises

जीणे की बस्ती में जीने की जंग, प्यास की आस, वादों के संग

- 1957 में पंजाब के हरीके बैराज से चला नहरी पानी अब तक नहीं पहुंचा गडरारोड- 1980-85 में नहरी पानी आ गया था जैसलमेर- 2008 में नर्मदा आ गई गुड़ामालानी चौहटन- 2012 में लिफ्ट से पानी पहुंच गया बाड़मेर शहर- 2021 का फिर कर दिया बॉर्डर से वादा

भीख भारती गोस्वामी

गडरारोड
80 वर्षीय जवाहराराम भील बताते हैं कि साठ साल पहले जब युवा थे तो वोट के लिए पहली बार गाड़ी गांव में आई। कहा था कि वोट दोगे तो पानी की समस्या का समाधान होगा। इसके बाद हर बार चुनाव के दौरान वोटों वाले लोग आए। पानी की समस्या के समाधान की बात कही लेकिन पानी की जंग एेसी ही है। जवाहराराम सीमावर्ती गांव जीणे भील की बस्ती में रहते हैं, जहां पानी आज भी मीलों दूर है और चुनाव नजदीक आते ही फिर वादों का सिलसिला शुरू हो गया है।

बॉर्डर के गांवों में पेयजल की आपूर्ति के लिए पानी की हौदियां बनी हैं लेकिन पंद्रह-पंद्रह दिन तक पानी नसीब नहीं होता। रेगिस्तान में बेरियों (छोटे कुओं) में कुदरती पानी है, जो मीलों दूर है। इसके भरोसे ही बॉर्डर के 200 से अधिक गांवों में पेयजल की पीड़ा का समाधान होता है। 1952 के चुनावों में पानी की समस्या का हल निकालने की बात हुई। 1957 में हरीके बैराज से इंदिरा गांधी नहर निकली तो कहा गया कि 1980 तक पानी पहुंच जाएगा। 1980 से 1985 के बीच इंदिरा गांधी नहर का पानी जैसलमेर तक पहुंच गया लेकिन इसके बाद बाड़मेर में आपूर्ति नहीं हो पाई। बॉर्डर के गांवों के लिए 1995 से 2000 के बीच एक नया ख्वाब बुना कि अब नर्मदा और इंदिरा गांधी दोनों नहरों को बॉर्डर के गडरारोड़ इलाके तक लाया जाएगा। 2007 में बजट जारी हुआ तो गुड़ामालानी और चौहटन के कुछ गांवों में नर्मदा नहर का पानी आया और इधर बाड़मेर लिफ्ट से बाड़मेर शहर व आसपास के गांवों में। बॉर्डर के गडरारोड़, रामसर, शिव के इलाकों में पानी की किल्लत जस की तस ही रही।

अब 2021 का ख्वाब

2014 में भरोसा दिया गया था कि 2017 तक बॉर्डर के गांवों में मीठा पानी आ जाएगा। लेकिन अब 2021 की नई तारीख दी जा रही है। एेेस में एक ओर चुनाव में लोगों के भरोसे की परीक्षा ली जा रही है।

25 साल पहले बनी हौदी 6 माह पानी आया

गडरारोड़ कस्बे से महज 5 किमी दूर जीणे की बस्ती में 25 साल पहले पानी के लिए हौदी बनी। केवल छह माह इसमें पानी आपूूर्ति हुई और तब से बंद है।- आसूराम भील

40 साल से इंतजार

40 वर्ष से मतदान कर रही हूं। वोट लेने के लिए नेताओं ने गाडिय़ां भी भेजी और वादे भी किए कि जीतने पर पानी की सुविधा करेंगे। लेकिन आज तक इन वादों पर कोई अमल नहीं हुआ- उम्मेदी देवी, जीणे की बस्ती

30 साल से एक ही वादा
शादी के दूसरे दिन ही पानी लेने घड़ा देकर भेजा, जो आज तक कायम है। मीलों दूर पानी लेने जाना पड़ता है। तीस साल से सिर पर घड़ा है लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ।- पैंपी देवी, जीणे की बस्ती

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