
Lack of ethical, Vedic philosophy, character building education
नैतिक शिक्षा, वेद दर्शन, चरित्र निर्माण वाली शिक्षा का अभाव
- आर्य समाज की संगोष्ठी आयोजित
बालोतरा.
मातृशक्ति पूजनीय, वंदनीय है। लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के बढ़़ते प्रभाव पर भारतीय संस्कृति का पतन हो रहा है। चरित्र निर्माण वाली शिक्षा के अभाव पर आज देश, समाज में कई प्रकार की विकृतियां आई है। नैतिक शिक्षा से ही समाज में सुधार लाया जा सकता है। सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने नगर के माली समाज गांधीपुरा में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।
उन्होंने गिरते मानवीय मूल्य, संस्कृति के पतन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मातृशक्ति, पूजनीय, वंदनीय, सत्कार के योग्य है, लेकिन अब अल्प वस्त्रों में अश्लीलता के साथ वे वस्तुओं के बेचने के लिए विज्ञापन तैयार कर भोंडा प्रदर्शन कर रही है। वहीं मनुष्य अल्पायु के बालक-बालिकाओं पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं। इसकी वजह युवाओं को केवल रोजगार परक शिक्षा दी जा रही है। नैतिक शिक्षा, वेद दर्शन, चरित्र निर्माण वाली शिक्षा का अभाव है। सती प्रथा जैसी घोर महिला विरोधी घटना को लेकर स्वामी अग्निवेश के नेतृत्व में दिवराला सती प्रथा के विरोध में दिल्ली से दिवराला तक ,आर्य समाज ने एक मजबूत आंदोलन खड़ा किया था।
गिरते मानवीय मूल्यों से ही मनुष्य पशुता की ओर जा रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर, वकील प्रशासनिक अधिकारी बनाने से पहले व्यक्ति को मनुष्य बनाएं। धैर्य, क्षमा, दम अस्तेय, शौच, इंद्रिय, निग्रह, विद्या, सत्य, शांति धर्म के दस लक्षण हैं। इन्हें जीवन में अपनाएं। मंत्री जितेन्द्र गहलोत ने बताया कि कार्यक्रम में 75 वर्ष पूर्णकर चुके जोगाराम आर्य, मंशाराम पंवार, अचलेश्वर आर्य, रामश्वरूप आर्य का आर्य समाज गांधीपुरा की ओर से बहुमान किया गया। विधायक मदन प्रजापत, पूर्व मंत्री अमराराम चौधरी, शास्त्री पंडित कुलदीप आर्य, कविता आर्य, आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के कार्यकारी प्रधान राम सिंह आर्य, भंवरलाल आर्य, गांधीपूरा आर्य समाज प्रधान सवाई आर्य, अचलचंद गहलोत, वागाराम आर्य, गणपत लाल गहलोत सहित कई लोग मौजूद थे।
Published on:
03 Apr 2019 09:48 am
