
fire in barmer rural area
बाड़मेर. जिले के गांवों में आशियाने आग की चपेट में आने के बाद कम ही ऐसे मामले सामने आए हैं, जब बचाव हो पाया हो। अधिकांश मामलों में आशियाने पूरी तरह स्वाह हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण दूरियां है, आग की तुरंत सूचना के बाद भी 100-150 किमी दूर दमकल के पहुंचने से पहले ही आशियाना आग की भेंट चढ़ जाता है। गर्मी के दिनों में तो हादसे दोगुने से अधिक होते हैं।
दमकल पहुंचने में दूरी सबसे बड़ी बाधा
लम्बे-चौड़े क्षेत्र में फैले जिले में दूरियां सबसे बड़ी समस्या है। वहीं दमकल की सुविधा बाड़मेर और बालोतरा में ही है। यहां सूचना के बाद दमकल रवाना होती है, लेकिन अगर दूरी है तो अधिकांश मामलों में दमकल पहुंचने तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है। दमकलकार्मिकों को दूरी अधिक होने से पहुंचने में काफी समय लग जाता है। वहीं गाड़ी में पानी भरकर ले जाने में स्पीड भी ज्यादा नहीं रख सकते, वर्ना पलटने का खतरा रहता है। ऐसे में 100 किमी पहुंचने में भी दमकल को दो-ढाई घंटे लग जाते हैं।
गर्मी में आग के मामले अधिक
गर्मी में आग के मामले बहुत अधिक हो जाते हैं। कई बार तो एक ही दिन में कई जगह आग से आशियाने जल चुके हैं। पिछले दिनों चौहटन क्षेत्र में आग से एक साथ 21 झोंपे जल गए। यहां अगर दमकल पास में होती तो नुकसान को कम किया जा सकता था। जानकारों का मानना है कि आग के 70 फीसदी मामले गर्मी में तो 30 फीसदी सर्दी में होते हैं। इसका कारण यह है कि गर्मी में आग जल्दी फैलती है। तेज हवा आग को और बढ़ा देती है।
आग के कारण खो चुके हैं अपने को
आग से जब अपनों को खो देते हैं, उन्हें जीवनभर उस दुख के साथ जीना पड़ता है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे, थार के इस लम्बे-चौड़े क्षेत्र में, जिन्होंने आग में अपनों को खोया है। इसमें बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक हैं। जो आग लगने पर बाहर निकल नहीं पाए।
पशुओं की गिनती भी नहीं
हर साल आग के कारण जलने वाले पशुओं की गिनती भी काफी मुश्किल है। जिले में सैकड़ों पशु आग का शिकार बन जाते हैं। कई बार पशुओं को बांधकर रखा जाता है। इस बंधन के कारण आग लगने की स्थिति में पशु खुद को बचाने में असहाय हो जाते हैं और काल का शिकार बन जाते हैं।
Published on:
14 May 2019 02:18 pm
