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दुनिया के 50 बेहतरीन जनरल में शुमार है लेफ्टिनेंट जनरल हणूतसिंह, पाक ने दी फख्र-ए-हिन्द की उपाधि

महावीर चक्र लेफ्टिनेंट जनरल हणूतसिंह को दुनिया के अब तक के 50 बेहतरीन जनरल में से एक माना जाता है। टैंक वार फेयर को लेकर जनरल हणूत की किताबें दुनिया भर में पढ़ाई जाती है। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में जनरल हणूत की 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट ने पाकिस्तान के 48 टैंक नष्ट कर युद्ध के मैदान में अप्रतिम शौर्य दिखाया, जिसके चलते उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया।

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Hanut singh

जालीपा स्थित सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर लगी जनरल हणूत की प्रतिमा।

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क/बाड़मेर। महावीर चक्र लेफ्टिनेंट जनरल हणूतसिंह को दुनिया के अब तक के 50 बेहतरीन जनरल में से एक माना जाता है। टैंक वार फेयर को लेकर जनरल हणूत की किताबें दुनिया भर में पढ़ाई जाती है। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में जनरल हणूत की 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट ने पाकिस्तान के 48 टैंक नष्ट कर युद्ध के मैदान में अप्रतिम शौर्य दिखाया, जिसके चलते उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया। सीमावर्ती जिले बाड़मेर से मेजर जनरल के ओहदे पर पहुंचने वाले व महावीर चक्र सम्मान हासिल करने वाले वह एकमात्र यौद्धा है। हैरत की बात यह है कि पाकिस्तान ने भी उनके शौर्य की सराहना करते हुए उन्हें फख्र-ए-हिन्द की उपाधि से नवाजा।

बसंतर के मोर्चे पर लड़े
1971 के भारत-पाक युद्ध में पंजाब व जम्मू कश्मीर क्षेत्र में बसंतर नदी में पाकिस्तान ने लैंड माइन्स का जाल बिछा दिया। इस मोर्चे पर जनरल हणूतसिंह की 17 पूना हॉर्स लड़ रही थी। नदी के उस पार पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजीमेंट थी। पाकिस्तान आश्वस्त था कि लैंडमाइन्स को पार करना भारतीय सेना के लिए असंभव होगा, लेकिन हणूत की सूझ बूझ से पूना हॉर्स ने रात के अंधेरे में लैंडमाइन्स से बचते हुए सुरक्षित रूप से नदी पार कर पाकिस्तान के 48 टैंक ध्वस्त कर दिए। जबकि अगली सुबह दिन के उजाले में भी लैंडमाइन्स से बचकर नदी पार करना संभव नहीं हो पाया।

इसलिए कहलाए फख्र-ए-हिन्द
पाकिस्तान के 48 टैंक ध्वस्त होने के दौरान कई सैनिक हताहत हुए। हणूत ने दुश्मन सैनिकों का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करवाया। हणूत के पराक्रम को देख चुके दुश्मन देश को जब उनकी मानवीयता के बारे में पता चला तो उन्हें फख्र-ए-हिन्द की उपाधि से नवाजा गया।

सेना ने भेंट किए टैंक
बाड़मेर के जसोल गांव में 6 जुलाई 1933 में जन्मे जनरल हणूत के सम्मान में पूना हॉर्स ने दो टैंक बाड़मेर को भेंट किए। एक टैंक जसोल में उनके घर के आगे खड़ा है तो दूसरा टैंक पुलिस लाइन बाड़मेर में है। बाड़मेर की 142 आर्म्ड बिग्रेड के मुख्य द्वार विजय द्वार पर जनरल हणूत की प्रतिमा लगाई गई है। वहीं शहर के महावीरनगर में एक पार्क इस बहादुर यौद्धा के नाम समर्पित किया गया है।

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सबसे पहले देश, आखिर में भी देश
जनरल हणूतसिंह अविवाहित रहे। उनका आदर्श वाक्य था-सबसे पहले देश, सबसे आखिर में भी देश। रिटायर होने के बाद देहरादून स्थित बाला सती आश्रम में भक्ति में लीन हो गए। समाधिस्थ अवस्था में 11 अप्रेल 2015 को प्राण त्याग दिए।