
Life partner giving life together
- पिछड़े जिले में महिलाएं भी रक्तदान को आगे
रतन दवे
बाड़मेर. सीमावर्ती जिले में रक्तदान का जज्बा इस कदर है कि यहां 25 से अधिक दंपती ने तय किया है कि वे एक साथ रक्तदान करेंगे। हर चार माह बाद ये दंपती अस्पताल पहुंचते है और यहां ब्लडबैंक में रक्तदान कर आते है। एक साथ 50 से अधिक युनिट खून मिलने कई लोगों की ङ्क्षजदगी बच रही है। जिले में महिलाओं की भी रक्तदान के प्रति रुचि का परिणाम है कि यहां 2500 से अधिक महिलाएं रक्तदान करती है।
जिला मुख्यालय पर रक्तदान को लेकर कई लोग जुनून की तरह कार्य करते है। यहां बने ब्लड डोनर्स ग्रुप में नवाचार करते हुए दंपती को प्रेरित करने का कार्य किया। नतीजा रहा कि कई जोड़े एक साथ रक्तदान को आने लगे। एक ही दिन पति पत्नी चार माह बाद यहां पहुंचते है और रक्तदान कर जाते है।
महिलाओं में उत्साह-
सीमावर्ती जिले की महिलाओं में खासा उत्साह है। यहां करीब 500 महिला रक्तदाता जुड़ी है। ये सालभर में 2500 युनिट रक्तदान करती है। अब दंपती साथ होने लगे है तो यह जज्बा लगातार बढऩे लगा है। यहां कार्य कर रहे एक सेवाआश्रम से जुड़ी महिलाएं साल में दो बार शिविर आयोजित कर एक साथ 200 युनिट से अधिक रक्तदान कर रही है। यहां बने ब्लड डोनर्स ग्रुप में नवाचार करते हुए दंपती को प्रेरित करने का कार्य किया। नतीजा रहा कि कई जोड़े एक साथ रक्तदान को आने लगे। एक ही दिन पति पत्नी चार माह बाद यहां पहुंचते है और रक्तदान कर जाते है।
यह एक संदेश है-
रक्तदान को लेकर दंपती से रक्तदान करवाना एक संदेश है। लोग इससे जुड़ रहे है। 25 के करीब दंपती जुड़ गए है। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा।
- भीमराज, बाड़मेर रक्तदाता समूह
नेक काम है
मैं रक्तदान करता रहा हूं। फिर तय किया कि पति पत्नी दोनों यह नेक काम करेंगे। इसलिए साल में एक बार दोनों ही एक साथ रक्तदान करते है।
- महेन्द्र धनदे-सुखदेवी
Published on:
14 Jun 2018 07:02 pm
