
Man's life is a mirror - Sadhvi, Suranjanaashree
मनुष्य का जीवन एक दर्पण-साध्वी सुरंजनाश्री
बाड़मेर। स्थानीय जैन न्याति नोहरा में नवपद ओली के छठे दिन रविवार को साध्वी सुरंजनाश्री ने दर्शन पद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन एक दर्पण है। उसके कर्मों के आधार पर महत्ता निरूपित होती है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने जीवन को भगवान महावीर के बताए सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़े तभी इस महत्ता बनी रहेगी। साध्वी ने सम्यक दर्शन का अर्थ बताते हुए कहा कि सम्यक दर्शन अर्थात सच्ची श्रद्धा, सत्य तत्वों में गहरी आस्था, सही दृष्टि, मार्ग या दिशाबोध। जिनवाणी पर अटूट श्रद्धा होने पर ही जीव सम्यक दर्शन का अनुभव कर सकता है।
खरतरगच्छ चातुर्मास व्यवस्था समिति के मीडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश बी. छाजेड़ ने बताया कि नवपद आराधना के उपलक्ष्य में रविवार को अष्ठमंगल पूजन, नवग्रह पूजन, दशदिकपाल पूजन आदि विविध अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
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मुनि मनितप्रभसागर ने कोटडिय़ा-नाहटा ग्राउण्ड में धर्मसभा में कहा कि एक ऐसा उत्तम तत्व जिसके बिना जीव की विकास-यात्रा प्रारंभ नहीं हो सकती वह सम्यकदर्शन है। यह एक ऐसा गुण है जिसके आसपास सारे गुण यथा क्षमा, कल्याण, नम्रता, संतोष आदि प्रदक्षिणा लगाते हंै। सम्यकदर्शन के बिना ज्ञान और चारित्र संभव नहीं है।
पारख अध्यक्ष व छाजेड़ बने महामंत्री
मुनि मनितप्रभसागर की निश्रा में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश लूणिया, राजस्थान पश्चिम क्षेत्र के प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम सेठिया, बाडमेर शाखा अध्यक्ष सुरेश बोथरा की अध्यक्षता में परिषद के पुनर्गठन के लिए बैठक रखी गई। इस अवसर पर मुनि ने कार्यकारिणी की घोषणा की। जिसमे बाडमेर शाखा के अध्यक्ष के लिए सर्वसम्मिति से प्रकाश पारख, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौतम संखलेचा, उपाध्यक्ष नरेश लूणिया, महामंत्री केवलचन्द छाजेड़, सह-मंत्री अनिल मेहता व मुरलीधर संखलेचा, कोषाध्यक्ष मदनलाल मेहता सह-कोषाध्यक्ष कपिल लूणिया, प्रसार-प्रचार कपिल मालू व लूणकरण नाहटा, स्वाध्याय प्रकोष्ठ राजू वडेरा व ललित मालू को मनोनीत किया गया। अंत में मुनि के सानिध्य में कार्यकारिणी को शपथ दिलाई गई।
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साधना भवन में आचार्य कवीन्द्रसागरसूरीश्वर एवं मुन कल्पतरूसागर की निश्रा में महातीर्थ गिरनार की भाव यात्रा का कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर मुनि कल्पतरूसागर ने गिरनार की महत्ता बताते हुए कहा शत्रुंजय गिरिराज का पांचवा शिखर है गिरनार महातीर्थ। जिस पर विराजित नेमिनाथ प्रभु की प्रतिमा विश्व की सबसे प्राचीन है। प्रभु नेमिनाथ की दीक्षा, केवलज्ञान एवं निर्वाणभूमि है। गिरनार अनागत चौबीसी यानि आनेवाली चौबीसी के 24-24 तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि रहेगी।
Updated on:
22 Oct 2018 07:43 pm
Published on:
22 Oct 2018 07:43 pm
