
Manvendra Singh Congress Candidate From Barmer
बाड़मेर. बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने मानवेन्द्रसिंह को प्रत्याशी घोषित किया। विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए मानवेन्द्र लोकसभा की टिकट को लेकर आश्वस्त थे लेकिन राजस्व मंत्री हरीश चौधरी की दावेदारी ने टकराहट की स्थिति पैदा कर दी थी। मानवेन्द्र को लोकसभा का टिकट देना मारवाड़ सहित प्रदेशभर में राजपूत मतदाताओं को जोडऩे से जोड़ा जा रहा है।
मानवेन्द्र का राजनीतिक सफर, चौथी बार लड़ेगे लोकसभा
मानवेन्द्रसिंह ने लोकसभा का पहला चुनाव भाजपा से 1998 में बाड़मेर से लड़ा। वे कांग्रेस के सोनाराम चौधरी से 32140 वोटों से हारे। 2004 में भाजपा ने दुबारा उनको टिकट दिया और रिकार्ड 2 लाख 71888 वोटों से जीते। 2009 तीसरी बार भाजपा से मानवेन्द्र को टिकट मिला लेकिन वे कांग्रेस के हरीश चौधरी से हार गए।
इसके बाद 2013 में मानवेन्द्रसिंह ने शिव से भाजपा से विधानसभा का चुनाव लड़ा और विधायक बने। 2014 के लोकसभा चुनावों में उनके पिता जसवंतसिंह को भाजपा ने बाड़मेर से टिकट नहीं दिया। जसवंतसिंह की जगह कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए कर्नल सोनाराम चौधरी को टिकट दे दिया,इससे नाराज हुए जसवंतङ्क्षसह ने यहां बाड़़मेर से निर्दलीय चुनाव लड़ा। जसवंतङ्क्षसह हार गए।
इसके बाद मानवेन्द्र की भाजपा के साथ ही तात्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से नाराजगी बढ़ती गई और 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। 2018 में वसुंधराराजे के सामने झालरापाटन से मानवेन्द्र ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और हार गए।
हरीश चौधरी ने किया था मजबूत दावा
विधानसभा चुनावों में झालरापाट से टिकट मिलने के बाद मानवेन्द्र ने कहा था कि वे लोकसभा का चुनाव लडऩा चाहते है। उस वक्त हरीश चौधरी बायतु से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे।
हरीश बायतु से जीतकर प्रदेश के राजस्व मंत्री बन गए और मानवेन्द्र झालरापाटन से चुनाव हार गए। लोकसभा चुनावों को लेकर गणित शुरू हुआ तो हरीश चौधरी ने भी दावेदारी प्रारंभ कर दी। एेसे में पार्टी के लिए निर्णय को लेकर काफी खींचतान चली।
जाट-राजपूत मतदाताओं सहित अन्य वोटों के गणित को लेकर कई बार लेखा-जोखा करते हुए आखिरकार मानवेन्द्र को टिकट दिया गया। हालांकि राहुल गांधी से हरीश चौधरी और मानवेन्द्र दोनों की नजदीकियां है।
टिकट मिलने के पांच कारण(मजबूत पक्ष )
- राहुल गांधी से नजदीकी
- भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने पर लोकसभा चुनाव की रखी थी शर्त
- अल्पसंख्यक, एससीएसटी और राजूपत वोटर्स का नया फार्मूला अपनाना चाह रही है कांग्रेस
- भाजपा से राजपूत प्रदेश में है नाराज, राजपूत वोटर्स में मानवेन्द्र है प्रदेश का बड़ा चेहरा
- पूर्व में रह चुके है सांसद, पिता जसवंतसिंह का भी क्षेत्र में बड़ा असर
कमजोर पक्ष
- कांग्रेस के लिए नया चेहरा
- राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और मानवेन्द्र में टिकट को लेकर चली खींचतान
- जाट मतदाताओं की नाराजगी
संसदीय क्षेत्र में जातिगत गणित (अनुमानित )राजपूत रावणा राजपूत- 2.40 लाख
जाट- 3.25 लाख
मुसलमान- 3.00 लाख
अनुसूचित जाति- 2.50 लाख
अनुसूचित जनजाति- 1 लाख
बा्रह्मण-1 लाख
विश्नोई- 50 हजार
ओबीसी- 5 लाख
मानवेन्द्रसिंह
उम्र-54 साल
पेशा- पत्रकारिता
सोशल मीडिया- ट्वीटर, फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम सहित कई जगह सोशल मीडिया पर सक्रिय
पहचान- पूर्व वित्त, विदेश और रक्षामंत्री जसवंतसिंह के पुत्र
अनुभव- 1998 में लोकसभा चुनाव बाड़मेर से हारे, 2009 में बाड़मेर से सांसद चुने गए, 2013 में शिव से विधायक चुने गए, 2018 में झालरापाटन से विधानसभा चुनाव हारे
अकसर कहां मिलते है- बाड़मेर में इंद्रानगर मे आवास
शिक्षा- स्नातक
परिवार में राजनीति
पिता जसवंतसिंह वित्त, विदेश व रक्षा मंत्री रहे। राज्यसभा से सांसद चुने गए। पत्नी चित्रासिंह मानवेन्द्र के साथ राजनीति में अब सक्रिय है और कांग्रेस की सदस्यता प्राप्त की है।
मानवेन्द्र की मां शीतलकंवर गृहिणी है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के एक पोस्टर विवाद को लेकर चर्चित रही।
Published on:
29 Mar 2019 12:37 am
